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बड़ी खबर: नगर निगम ने 10 हजार पेंशनधारियों को दी सजा, कसूर सिर्फ इतना कि शासन ने इन्हें पंचायत से ले आया निगम में, भूखों मरने की आई नौबत…

बड़ी खबर: नगर निगम ने 10 हजार पेंशनधारियों को दी सजा, कसूर सिर्फ इतना कि शासन ने इन्हें पंचायत से ले आया निगम में, भूखों मरने की आई नौबत...

बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम करीब 10 हजार पेंशनधारियों को 5 माह से पेंशन का भुगतान नहीं कर रहा है। इनका कसूर सिर्फ इतना है कि इन्हें राज्य शासन पंचायत से निगम में ले आया है। सारी कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी पेंशन नहीं मिलने से हितग्राही परेशान हैं। कोरोना के चलते लॉकडाउन चल रहा है। रोजगार बंद है। ऐसे में इनके सामने भूखों मरने की नौबत आन पड़ी है, जिसकी परवाह निगम के जिम्मेदार अफसरों को नहीं है। इस मामले का खुलासा बिल्हा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष विक्रम सिंह ने किया है।

2019 में बिलासपुर नगर निगम का नए सिरे से परिसीमन किया गया। इस दौरान जिले की 15 ग्राम पंचायतों और तीन नगरीय निकाय को भी बिलासपुर निगम के दायरे में शामिल किया गया। नए सिरे से किए गए परिसीमन में बिलासपुर निगम में 70 वार्ड बनाए गए। नवंबर 2019 में चुनाव हुआ। निगम की सत्ता पर कांग्रेस की वापसी हो गई। कांग्रेस के दिग्गज नेता और अनुभवी पार्षद रामशरण यादव निर्विरोध मेयर निर्वाचित हुए। बिलासपुर नगर निगम में शामिल होने के बाद 15 ग्राम पंचायतों व 3 नगरीय निकायों के सारे रिकार्ड नगर निगम बिलासपुर को सौंप दिए गए। जनपद पंचायत बिल्हा और मस्तूरी ने अपने क्षेत्र की उन 15 पंचायतों के करीब 10 हजार पेंशनधारियों को अक्टूबर 2019 तक की पेंशन का वितरण कर दिया, जो निगम में शामिल हो गए थे। नवंबर 2019 से पेंशन देने का जिम्मा नगर निगम प्रशासन पर आ गया। वर्तमान में अप्रैल 2020 चल रहा है, लेकिन अब तक इन हितग्राहियों को एक माह की पेंशन नहीं मिली है। दूसरी ओर, देश के साथ प्रदेश में भी कोरोना को लेकर लॉकडाउन चल रहा है। ऐसे में लोग स्वयं को घरों में कैद लिए हैं। जिला व पुलिस प्रशासन भी हर मोहल्ले में ड्यूटी देते हुए लोगों के घरों से निकलने पर पाबंदी लगा रखी है। शहर में पूरा कामकाज बंद है। छोटे से लेकर बड़े उद्योगों में ताले लग गए हैं। इस स्थिति में इन पेंशनधारियों के सामने भूखों मरने की नौबत आन पड़ी है। सब कुछ जानते हुए भी निगम प्रशासन इन पेंशनधारियों की सुध नहीं ले रहा है। पेंशनधारियों के दर्द की बात सुनकर जनपद पंचायत बिल्हा के उपाध्यक्ष विक्रम सिंह का दिल पसीज गया। उन्होंने इन्हें जल्द ही पेंशन दिलाने के लिए निगम आयुक्त प्रभाकर पांडेय को पत्र लिखा है, लेकिन 24 घंटे बाद भी निगम प्रशासन की ओर से किसी तरह की पहल नहीं की जा रही है। उपाध्यक्ष विक्रम सिंह का कहना है कि ऐसे समय में गरीब हितग्राहियों की सुध नहीं लेना कांग्रेस सरकार और निगम प्रशासन की नियत को दर्शाता है कि वह गरीबों के प्रति क्या सोचते हैं। इस मामले में पक्ष जानने के लिए निगम आयुक्त प्रभाकर पांडेय से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने रिंग जाने के बाद भी मोबाइल कॉल रिसीव नहीं किया।

सर्वे रिपोर्ट निगम ने दबाई

सूत्रों की मानें तो 15 पंचायतों के पेंशन हितग्राहियों की सूची मिलने के बाद नगर निगम प्रशासन ने अपनी टीम से सर्वे कराया। सर्वे टीम को पात्रता और अपात्र की सत्यता जानने के निर्देश दिए गए थे। टीम ने सर्वे कर अपनी रिपोर्ट निगम को सौंप दी है। इसके बाद भी निगम प्रशासन ने इस रिपोर्ट को समाज कल्याण विभाग के उप संचालक के पास नहीं भेजी है। बता दें कि समाज कल्याण विभाग के माध्यम से ही हितग्राहियों को पेंशन का भुगतान किया जाता है।

मेयर बोले- शासन की जाएगी बात
मेयर रामशरण यादव का कहना है कि पंचायत से निगम में शामिल हुए हितग्राहियों को पेंशन क्यों नहीं मिल रही है। इस बारे में राज्य शासन से बात की जाएगी, क्योंकि पेंशन की राशि शासन से ही आती है।

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