छत्तीसगढ़बिलासपुर

बिलासपुर: जिला पंचायत सामान्य सभा से गायब जिला अधिकारियों को दिया जाएगा शोकाज नोटिस… स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भड़के सदस्य…

बिलासपुर। चीफ सेक्रेटरी आरपी मंडल की बैठक में हाजिर रहने के बाद जिला पंचायत सामान्य सभा की बैठक से गायब जिला अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिरेगी। जिला पंचायत के सभी सदस्यों ने ऐसे अधिकारियों की सूची बनाकर सभी से जवाब मांगने का प्रस्ताव पास किया है। दूसरी ओर, जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। अव्यवस्था सामने आने पर खुद अध्यक्ष अरुण चौहान लाचार दिखे। उन्होंने स्वास्थ्य समिति के सभापति अंकित गौरहा से बैठक बुलाने की बात कही तो अंकित ने कहा कि सामान्य सभा की बैठक से सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन गायब हैं। यदि वे स्वास्थ्य समिति की बैठक में नहीं आएंगे तो बैठक का औचित्य ही क्या रहेगा।

जिला पंचायत सामान्य सभा की बैठक शुक्रवार दोपहर जिला पंचायत सभाकक्ष में हुई। बैठक में एजेंडावार चर्चा शुरू हुई तो यह मामला सामने आया कि अधिकांश विभागों के जिला अधिकारी बैठक से गायब हैं। उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को आधी-अधूरी जानकारी देकर बैठक में भेज दिए हैं। इस मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्यों और विधायक द्वय रश्मि सिंह व डॉ. कृष्ण मूर्ति बांधी ने जमकर नाराजगी जताई। पूछताछ करने पर प्रतिनिधियों ने बताया कि मंथन सभाकक्ष में चीफ सेक्रेटरी मंडल ने बैठक ली है। दोपहर दो बजे तक बैठक समाप्त हो गई, जिसके बाद जिलाधिकारी घर लौट गए। अध्यक्ष अरुण चौहार ने मंथन की बैठक में शामिल होने वाले और सामान्य सभा की बैठक से गायब रहने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने का प्रस्ताव लाया, जिसे ध्वनिमत पारित कर दिया गया। जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह चौहान ने सदन को बताया कि इन अधिकारियों की सूची मंगाकर नोटिस जारी किया जाएगा। फिर जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अंकित बोले- मस्तूरी सोसाइटी में खाद नहीं

कृषि विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य समिति के सभापति अंकित गौरहा ने मस्तूरी सोसाइटी में खाद नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी के सीजन में मस्तूरी सोसाइटी में खाद नहीं है। ऐसे में किसान कैसे खेती करेंगे। उनकी बातों का मस्तूरी विधायक डॉ. बांधी ने भी समर्थन किया। अंकित ने कृषि अधिकारी से पूछा कि कब तक सोसाइटी में खाद की आपूर्ति कर ली जाएगी, लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं था। वे सिर्फ इतना कह पाए कि यह काम जिला सहकारी बैंक के माध्यम से होता है। बैठक में जिला सहकारी बैंक से कोई भी अधिकारी-कर्मचारी नहीं आया था।

सिम्स में अव्यस्था से तखतपुर विधायक नाराज

स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान तखतपुर विधायक रश्मि सिंह ने अधिकारी से पूछा कि क्या सिम्स में कोरोना जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हां में जवाब आने पर उन्होंने फिर पूछा कि क्या कोरोना मरीज और अन्य सामान्य मरीजों के प्रवेश के लिए अलग-अलग द्वार बनाए गए हैं, तो अधिकारी ने जवाब दिया कि नहीं… इस बात को लेकर वे खफा हो गईं। उन्होंने कहा कि सिम्स में कोरोना मरीज खुलेआम घूम रहे हैं। सामान्य लोग उनके संपर्क में आ रहे हैं और सिम्स प्रबंधन मौन बैठा है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मेंटल हॉस्पिटल के डॉक्टर की निजी क्लीनिक

बैठक के दौरान एक जिला पंचायत सदस्य मुद्दा उठाते हुए कहा कि सेंदरी स्थित मेंटल हॉस्पिटल में डॉ. श्रीवास्तव पदस्थ हैं, लेकिन वे कभी-कभार मेंटल हॉस्पिटल में बैठते हैं। उन्होंने अपने घर में बकायदा निजी क्लीनिक खोकर रखा है, जहां अधिकांश समय वे इलाज करते हैं। जिला पंचायत सदस्य ने दावा करते हुए बताया कि मेंटल हॉस्पिटल की रजिस्ट्रेशन रजिस्टर देखी जाए तो यह पता चल जाएगा कि डॉ. श्रीवास्तव यहां से कई गुना मरीजों का इलाज अपने निजी क्लीनिक में करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर आए प्रतिनिधि को डॉ. श्रीवास्तव पर लगाम कसने की बात कही गई।

मरवाही के हॉस्पिटल से सीधे सिम्स रेफर

मरवाही क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य ने सदन को बताया कि मरवाही में स्वास्थ्य केंद्र है। वहां हड्‌डी फ्रैक्चर का एक्सरे करने वाले का वेतन निकल रहा है, लेकिन ऐसे केस को सीधे बिलासपुर स्थित सिम्स रेफर कर दिया जाता है। सदन ने इस मामले की जांच कराने का प्रस्ताव पास किया है।

सरकारी अस्पतालों के सूचना बोर्ड पर चस्पा करेंगे डॉक्टरों के नंबर

बैठक में यह बात सामने आई कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों, उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की पदस्थापना की गई है, लेकिन वे वहां मिलते ही नहीं। ज्यादातर डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हैं। स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले मरीजों को सीधे सिम्स रेफर कर दिया जाता है। यहां तक डिलिवरी केस को भी। इससे होता यह है कि मरवाही, गौरेला, पेंड्रा से बिलासपुर आने से पहले रास्ते में महिलाओं का असुरक्षित प्रसव हो जाता है। बैठक में यह तय किया गया कि निजी हॉस्पिटलों की तर्ज पर सरकारी अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टरों के मोबाइल नंबर दर्ज कराए जाएंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज के परिजन संबंधित डॉक्टर से बात कर सकें।

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