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छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश की पहली निःशुल्क ‘नालसा’ विधिक सहायता हेल्प लाईन का किया शुभारंभ…जरूरतमंद लोगों को जल्द, सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने में मददगार…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज एक नया इतिहास रचा गया, जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश की पहली निःशुल्क ’नालसा’ विधिक सहायता हेल्प लाईन नम्बर 15100 का शुभारंभ किया। जिला न्यायालय परिषद रायपुर के परिसर में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधिक सहायता प्राधिकरण (नालसा) की इस हेल्प लाईन की शुरूआत की गई। यह हेल्प लाईन कानूनी सलाह देने के लिए पूरी तरह से निःशुल्क हेल्प लाईन होगी। मुख्यमंत्री ने न्यायालय परिसर में ए.डी.आर. भवन और न्याय सदन का भूमि पूजन भी किया। सर्व सुविधायुक्त ए.डी.आर. (आल्टरनेटिव डिस्प्यूट रिसालुशन) भवन का निर्माण 2 करोड़ 42 लाख रूपए की लागत से और न्याय सदन का निर्माण एक करोड़ 28 लाख रूपए की लागत से किया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति पी.आर. रामचंद्र मेनन ने की। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के कार्यपालक अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री बघेल और मुख्य न्यायाधीश मेनन ने हेल्प लाईन नम्बर पर फोन लगाकर बात की और हेल्प लाईन के शुभारंभ के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश की पहली नालसा विधिक सहायता हेल्प लाईन की शुरूआत छत्तीसगढ़ से हो रही है, यह हमारे लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों को जल्द, सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने में यह हेल्प लाईन बड़ी मददगार होगी। बघेल ने कहा कि इस हेल्प लाईन की जानकारी लोगों तक पहंुचाने के लिए राज्य सरकार के विज्ञापनों में भी इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उन्होंने न्यायिक प्रशासन में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए भी राज्य शासन के स्तर से उचित पहल का आश्वासन दिया।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति पी.आर. रामचंद्र मेनन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह विधिक सहायता हेल्प लाईन गरीबों में सबसे गरीब जरूरतमंद लोगों के लिए प्रारंभ की गई है। इसका लाभ अधिक से अधिक लोग उठा सके इसके लिए जरूरी है कि प्रिंट और विजुअल मीडिया और सिनेमा के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। जिससे लोग इस हेल्प लाईन के प्रति जागरूक हो सके और इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठा सके। उन्होंने रिक्त पदों की पूर्ति की ओर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। न्यायमूर्ति मेनन ने कहा कि न्यायिक मामलों के त्वरित निराकरण के लिए न्यायिक सेवा के अधिकारी और अधिवक्ता प्राथमिकता तय कर लोगों को त्वरित न्याय दिलाने की पहल करें। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के कार्यपालक अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी और अमन सत्या कचरू ट्स्ट के संस्थापक प्रोफेसर राजेन्द्र कचरू ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। जिला न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के अध्यक्ष राम कुमार तिवारी ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के निर्देश पर रायपुर में प्रारंभ की गई यह विधिक सहायता हेल्प लाईन भारत की पहली समेकित और प्रतिनिधित्व प्रणाली पर आधारित निःशुल्क विधिक सहायता हेल्प लाईन है, जिसकी मदद लेने वाले सभी व्यक्तियों को बेहतर ढ़ंग से विधिक सलाह और सहायता उपलब्ध करायी जाएगी। यह हेल्प लाईन प्रदेश के अन्य सभी हेल्प लाईन नंबर और विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जरूरतमंद लोगों को यथाशीघ्र सहायता उपलब्ध कराएगी। यह हेल्प लाईन वर्तमान में सखी वन स्टॉप सेंटर और 181 महिला हेल्प लाईन के साथ संयोजित है और उनके द्वारा उपलब्ध सुविधा एवं सेवा लोगों को तुरंत उपलब्ध करायी जा सकती है।

प्रस्तावित ए.डी.आर. भवन और न्याय सदन का निर्माण हो जाने के बाद न्यायालय आने वाले पक्षकारों को अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी। ‘न्याय सदन’ में निःशुल्क विधिक सेवा व सलाह एवं सहायता, लोक अदालत का आयोजन, विभिन्न प्रकार के विधिक साक्षरता शिविर आदि आयोजित किए जा सकेंगे। इस बिल्ड़िग में गरीब, असहाय, मजदूर वर्ग, तथा समाज के पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए तथा दूर-दराज से आने वालों लोगों के लिए रात्रिकालीन रहने की व्यवस्था रहेगी।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के सदस्य सचिव सिद्धार्थ अग्रवाल ने आभार प्रकट किया। इस अवसर पर जिला न्यायालय रायपुर के न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण व कर्मचारीगण तथा नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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