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छत्तीसगढ़: पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की हालत बिगड़ी, कार्डियक अरेस्ट के कारण हालत गंभीर अस्पताल में भर्ती…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की अचानक तबीयत खराब हो गई है, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके बेटे अमित जोगी ने बताया कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट होने के बाद रायपुर के श्री रायणा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल वह वेंटिलेटर पर हैं। अजीत जोगी स्टॉफ के हवाले से कहा जा रहा है कि सुबह नाश्ते के दौरान सीने में अचानक दर्द महसूस हुआ और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। पति को कराहते हुए देखकर पत्नी रेणु ने घर पर मौजूद स्टॉफ को बुलाया और आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंची।

बताया जा रहा है कि अजीत जोगी की तबियत खराब होने की सूचना मिलने पर बेटे अमित जोगी बिलासपुर से रायपुर पहुंचे हैं। यहां आपको बता दें कि लंबे समय से अजीत जोगी व्हील चेयर पर हैं। रोड एक्सीडेंट में उनके पैर को नुकसान हुआ था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को कॉल किया और उनके सेहत के बारे में पूछा।

सीएम के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में लिखा गया है- ‘छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी जी के स्वास्थ्य के बारे में उनके सुपुत्र अमित जोगी जी से फ़ोन पर बात हुई। मैंने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।’ सीएम बघेल ने अमित जोगी को आश्वस्त किया कि अजीत जोगी के स्वास्थ्य के संबंध में राज्य सरकार द्वारा हर संभव पहल की जाएगी। आपको मालूम हो कि अजीत जोगी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। हालांकि अब उन्होंने छत्तीसगढ़ जोगी कांग्रेस (जेसीसीजे) पार्टी बना ली है।

लॉकडाउन में फंसे प्रवासियों को लेकर अजीत जोगी ने आज ही सुबह एक ट्वीट किया, ‘प्रवासी मजदूरों का दुख असहनीय होता जा रहा है। जैसे वंदे भारत चालू किया गया है वैसा ही भारत के सभी संसाधनों का उपयोग कर अर्थात सभी रेल,सभी निजी और सरकारी ट्रक और बसों को लगाकर अभियान चलाकर 4 दिन में इन सबको इनके राज्य की सीमा तक पहुंचा दें।उनकी स्थिति देखकर पीड़ा होती है।’

बता दे, पिछले विधानसभा चुनाव में अजीत जोगी की पार्टी ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया था, लेकिन उन्हें खास फायदा नहीं हुआ था। विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 90 में से 35 सीटों पर बसपा और 55 सीटों पर गठबंधन में अजीत जोगी की पार्टी ने चुनाव लड़ा। दोनों के गठबंधन को सात सीटें मिली थीं, जिनमें दो बसपा की थीं। इसके बाद लोकसभा चुनाव में सभी 11 सीटों पर बसपा ने अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।

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