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योगी सरकार ने बसों को प्रवेश की नहीं दी अनुमति, विरोध में धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं को किया गया गिरफ्तार…

भरतपुर जिले के आगरा-बीकानेर हाइवे स्थित ऊंचा नगला बॉर्डर पर कांग्रेस पार्टी ने ऊंचा नगला सीमा पर हाइवे पर पैदल जा रहे श्रमिकों को घर भेजने के लिए लगभग 500 बसों का इंतजाम किया लेकिन उत्तरप्रदेश सरकार ने बसों को जाने की अनुमति नहीं दी। अनुमति नहीं मिलने के विरोध में प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू, राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल, पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी सहित अनेकों कांग्रेस कार्यकर्ता सीमा पर ही धरने पर बैठ गए। इस पर उत्तर प्रदेश प्रशासन के स्थानीय अधिकारियों द्वारा तीनों नेताओ को मौके पर गिरफ्तार किया गया, जिन्हें फतेहपुर सीकरी थाने ले जाया गया।

दूसरी तरफ भाजपा ने कांग्रेस के इस कदम को नौटंकी करार दिया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां ने प्रियंका गांधी द्वारा मज़दूरों को लेकर जाने के लिए उप्र सरकार को दी गई बसों की सूची में बसों की जगह टैक्सी और मोटरसाइकिल के नम्बर देने की निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा की तरह मज़दूरों के साथ घिनौना मजाक कर रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान से ट्रकों में बैठा कर भेजे गए मज़दूर सड़क दुर्घटना का शिकार होकर जान गंवा रहे हैं, दूसरी तरफ़ अपनी ज़िम्मेदारी को निभाने में विफ़ल मुख्यमंत्री इस विपदा के समय में भी गांधी परिवार की चापलूसी में पीछे नहीं हट रहें है। राजस्थान की सरकार और कांग्रेस को गरीब के साथ मजाक बंद कर अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए।

कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव जुबेर खान ने उत्तर प्रदेश प्रशासन को बताया कि यह बसें कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के आहवान पर सीमा पर लगाई गई है, पूर्व में उत्तर प्रदेश प्रशासन ने लगभग 500 वर्षों की अनुमति देने की बात कही थी, इसीलिए यह बसें लाखों मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए भरतपुर जिले से ऊंचा नगला (राजस्थान) में तैयार खड़ी है। हर बस में सैनिटाइजर मास्क एवं आवश्यक उपकरण रख दिए गए हैं।

इस मौके पर राज्यमंत्री डॉ सुभाष गर्ग ने सरकार के इस रवैये को हास्यस्पद बतलाते हुए कहा कि उत्तरप्रदेश भाजपा सरकार अपने राजनीतिक प्रतिशोध के नाम पर प्रवासी गरीब मजदूरों को प्रताड़ित करने का काम कर रही है। इस महामारी के समय मे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वादाखिलाफी की गई। पहले पत्र लिखकर अनुमति देने की बात कही फिर जब हम बसों को लेकर बॉर्डर पर पहुंचे तो वहां के स्थानीय प्रशासन ने सरकार से कोई भी अनुमति नहीं मिलने की बात कहकर बसों को जाने से रोक दिया।

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