स्वास्थ्य

क्या है वैक्सीन पेटेंट, इसके हटने से कैसे पूरी दुनिया का होगा फायदा, भारत साथ पर अमीर देश क्यों हैं खिलाफ? जानें हर सवाल का जवाब…

अमेरिका ने कोरोना महामारी को देखते हुए पेटेंट हटाने को लेकर अपनी सहमति जताई है। इसके साथ ही दुनिया में वैक्सीन की कमी से जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इसके साथ ही यह भी तय है कि पेटेंट हटा तो दुनियाभर में टीके की कमी दूरी हो जाएगी। हालांकि अमीर देश पेटेंट हटाने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं, भारत समेत दुनिया के कई देशों ने इसका समर्थन किया है।

क्या है वैक्सीन पेटेंट

आमतौर पर पेटेंट एक कानूनी अधिकार है। यह किसी भी तकनीक, खोज, सेवा या डिजाइन को बनाने वाली कंपनी, संस्था या व्यक्ति को दिया जाता है, जिससे कि उसके उत्पाद का कोई नकल न कर सके। बिना अनुमति के अगर कोई कंपनी किसी उत्पाद को बनाने लगे तो वह गैरकानूनी होगा। इसके साथ ही उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे होगा फायदा

विश्व में फिलहाल कोरोना के जितने भी टीके बन रहे हैं उन सभी कंपनियों के उस टीके का पेटेंट है। इसके साथ ही वैक्सीन का उत्पादन केवल वही कंपनी कर सकती है। ऐसे में अगर वैक्सीन पर से पेटेंट हटाया जाता है तो वैक्सीन को बनाने की तकनीक दूसरी कंपनियों को भी मिल जाएगी। इससे टीके की कमी दूर होगी और उसकी कीमत भी कम होगी।

सिर्फ कोरोना के लिए छूट

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन ताई ने कहा है कि जो बाइडन प्रशासन बौद्धिक संपदा की सुरक्षा का समर्थन करता है, लेकिन वैक्सीन पेटेंट में छूट सिर्फ कोरोना वायरस महामारी के खात्मे तक ही दी जाएगी। उन्होंने कहा, यह वैश्विक स्वास्थ्य संकट है। कोविड-19 की विपरीत परिस्थितियां बड़ी पहल करने के लिए बाध्य कर रही हैं।

भारत समेत कई देश समर्थन में

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने पिछले साल अक्तूबर में विश्व व्यापार संगठन से वैक्सीन पर से पेटेंट हटाने की मांग की थी। बता दें कि भारत और दक्षिण अफ्रीका की इस मांग को फिलहाल 100 से ज्यादा देशों ने समर्थन किया है। सबसे बड़ी बात अमेरिका ने भी इस पहल का समर्थन किया है। हालांकि बता दें कि पहले अमेरिका इसके विरोध में था।

अमीर देश पेटेंट के विरोध में

ब्रिटेन, कनाडा, यूरोपीय संघ समेत कई अमीर देश पेटेंट हटाना नहीं चाहते हैं। इसके अलावा दुनियाभर की फार्मा कंपनियां भी इसके विरोध में हैं, क्योंकि फार्मा कंपनियों के लिए यह कमाई का बड़ा मौका है। इसके साथ ही इन कंपनियों का कहना है कि उन्होंने करोड़ों रुपए खर्च कर इन वैक्सीन को बनाया है।

छूट के नियम डब्ल्यूटीओ में तुरंत तय किए जाएं: विशेषज्ञ

विशेषज्ञों ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) सदस्य देशों को कोविड-19 टीकों को लेकर पेटेंट नियमों में छूट के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिये तत्काल बातचीत शुरू करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि जिस तेजी से संक्रमण फैल रहा है, उसके लिए यह जरूरी है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के डब्ल्यूटीओ में कोविड-टीकों को लेकर पेटेंट नियमों में छूट देने के प्रस्ताव को अमेरिका के समर्थन के साथ विशेषज्ञों ने यह बात कही। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अक्टूबर 2020 में कोविड-19 संक्रमण के इलाज, उसकी रोकथाम के संदर्भ में प्रौद्योगिकी के उपयोग को लेकर डब्ल्यूटीओ के सभी सदस्य देशों के लिए ट्रिप्स समझौते के कुछ प्रावधानों से छूट देने का प्रस्ताव किया।

डब्ल्यूटीओ का करार 1995 में अमल में आया

व्यापार संबंधित पहलुओं पर बौद्धिक संपदा अधिकार (ट्रिप्स) का डब्ल्यूटीओ का करार जनवरी, 1995 में अमल में आया। यह कॉपीराइट, औद्योगिक डिजाइन, पेटेंट और अघोषित सूचना या व्यापार गोपनीयता के संरक्षण जैसे बौद्धिक संपदा पर बहुपक्षीय समझौता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डब्ल्यूटीओ में बातचीत जितनी जल्दी हो, निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए क्योंकि दुनिया को कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और संक्रमित लोगों के इलाज के लिए टीकों और अन्य चिकित्सा उत्पादों की जरूरत है।

डब्ल्यूटीओ के प्रमुख ने विस्तृत प्रस्ताव शीघ्र मांगा

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की प्रमुख नगोजी ओकोंजो-इवेला ने कोविड-19 की रोकथाम और इलाज के लिए पेटेंट संबंधी संगठन के समझौते के कुछ प्रावधानों में ढ़ील की मांग उठाने वाले देशों से संशाधित प्रस्ताव जल्द पेश करने को कहा है। उन्होंने प्रारंभिक प्रस्ताव रखने वाले देशों से जितनी जल्दी संभव हो उतनी जल्दी संशोधित प्रस्ताव सौंपने को कहा है ताकि लिखित-प्रस्तावों पर आधारित बातचीत शुरू की जा सके। संगठन की महा-निदेशिका ने इस मुद्दे पर अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाई के सकारात्मक बयान का स्वागत किया है। नगोजो ने कहा कि वह कोविड-19 महामारी से लड़ने में मदद के लिए ट्रिप्स समझौते में कुछ अस्थायी छूट के प्रस्तावकों के साथ जुड़ने की कैथरीन की तत्परता का भरपूर स्वागत करती हैं।

अमेरिकी समर्थन से उपजी नई स्थिति पर ध्यान दे रहा है स्विट्जरलैंड

स्विट्जरलैंड ने कहा है कि वह कोविड19 के टीकों के मामले में पेटेंट नियमों को अस्थायी रूप से हटाने की मांग को अमेरिका के समर्थन के बाद पैदा हुई नयी स्थिति पर ध्यान दे रहा है। गौरतलब है कि गत अक्तूबर में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने कोविड की रोकथाम या इलाज से जुड़ी औषधियों पर व्यापार में बौद्धिक संपदा अधिकार पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की संबंधि (ट्रिप्स) के प्रावधानों में छूट दिए जाने का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्येश्य गरीब और विकासशील देशों के लिए कोविड19 के टीके एवं दवाओं को सस्ता और सुलभ बनाना है। टीके से जुड़े पेटेंट नियमों में अस्थायी रूप से छूट के लिए डब्ल्यूटीओ के सामने पेश की गयी भारत और दक्षिण अफ्रीका की इस पहल का अमेरिकी प्रशासन ने समर्थन किया है।

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