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वैज्ञानिक पर महिला कर्मी ने लगया शारीरिक व मानसिक शोषण का आरोप… महिला ने कार्रवाई करने कलेक्टर से लगाई गुहार…

बिलासपुर- कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दुष्यंत कौशिक पर वहां कार्यरत महिला कर्मी द्वारा मानसिक एवं शारीरिके प्रताडऩा के संबंध में कलेक्टर के पास शिकायत दर्ज की गई हैं। शिकायतकर्ता कृषि विज्ञान में विषय वस्तु विशेषज्ञ पद पर कार्यरत हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 से उनकी नियुक्ति कृषि विज्ञान केंद्र में है। वर्ष 2014 में सेवा नियमित होने के बाद उनके द्वारा अध्ययन अवकाश लिया गया। इस दौरान डॉ. दुष्यंत कौशिक को वर्तमान पद पर नियुक्त किया गया। पीड़िता ने बताया, कि दुष्यंत कौशिक से वे पूर्व से परिचित थीं। इसलिए उनकी नियुक्ति पर उनके द्वारा किसी तरह कि आपत्ति नहीं हुई। कुछ समय बाद उनके पति की एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई। इसकी जानकारी दुष्यंत कौशिक को जैसे ही मिली उसके बाद उनके व्यवहार में परितर्वन देखने को मिला। उन्होंने बताया दुष्यंत कौशिक द्वारा बार-बार बिना किसी वजह के मेरे केबिन में आना-जाना शुरु कर दिया। इस दौरान उनके द्वारा मुझे बहाने से छूने का प्रयास किया जाने लगा। इसके साथ ही मेरे से अनैतिक़ मांग की जाने लगी। विरोध करने के बावजूद भी दुष्यंत कौशिक द्वारा मुझे अनुचित ढंग से छुआ जाने लगा। पद में मेरे से बड़े होने के साथ ही मेरे सहकर्मी हैं। इसलिए मेरे द्वारा उनको समझाइश भी दी गई। इसके बाद से लगातार दुष्यंत कौशिक द्वारा मुझे शारीरिक व मानसिक उत्पीडऩ दिया जाने लगा। इसके साथ ही मेरे विरुद्ध विभागीय कार्यवाई की बात क़हक़र डराया भी गया। मानसिक रुप से परेशान होते हुए मैंने निश्चय किया कि उच्च शिक्षा के बहाने अध्ययन अवकाश लूं जिससे डॉ. दुष्यंत कौशिक से भी मुझे छुटकारा मिल जाएगा। अध्ययन अवकाश देने के लिए भी दुष्यंत कौशिक ने काफी लेट-लतीफी की। अवकाश देने के बाद भी फोन के माध्यम से उनके द्वारा अनैतिक बात कही जा रही थी। मेरे द्वारा थाने में लिखित शिकायत करने की बात कहने पर दुष्यंत कौशिक द्वारा मौखिक माफी मांगी गई। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से विभाग में दुष्यंत कौशिक द्वारा मेरे विरुद्ध कई झूठी शिकायतें भी विभाग में की गई। बिना किसी आधार के मेरा वेतन भी रोक दिया गया। जिसे लेकर मुझे उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करनी पड़ी। उसके बाद मुझे फिर से पदभार दिया गया। पदभार ग्रहण करने के बाद फिर से दुष्यंत कौशिक द्वारा मेरे पास आकर उनके द्वारा की जा रही नजायज मांग को हां करने के लिए दबाव बनाए जाने लगा। जब बात फिर भी नहीं बनी तो दुष्यंत कौशिक द्वारा लगातार मुझपर छिंटाकशी की जा रही है। मेरे चरित्र को लेकर कई तरह के लांछन लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही रोड एक्सीडेंट में मेरे पति की जो मृत्यु हुई थी उसे भी लेकर कई तरह के अनैतिक बातें दुष्यंत कौशिक द्वारा विभाग में फैलाई जा रही है। श्री कौशिक द्वारा स्पष्ट तौर से कह दिया गया है अगर मैं उनकी अनैतिक मांगों को नहीं मानूंगी तो आपराधिक प्रकरण के आधार पर नौकरी से हटाने की धमकी भी दी जा रही है। इसके साथ ही उनके द्वारा आश्वासन दिया जा रहा है की अगर उनकी मांगों को मैं मान लेती हूं तो मुझे ज्यादा से ज्यादा लाभ दिया जाएगा।

इस संबंध में मेरे द्वारा लैंगिक अपराधों के निराकरण द्वारा गठित विशाखा कमेटी में 14 नवंबर को शिकायत की गई थी। उसके बावजूद वर्तमान समय तक किसी भी तरह की कार्यवाई नहीं की गयी। पीड़िता ने कलेक्टर से गुहार लगाई है, कि भारतीय दंड विधान की धारा 354, 354ए, 509 के अंतर्गत अपराध दर्ज करें।

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