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कोरोना वाइरस: भारत में 26 लोगों के टेस्ट पर मिल रहा एक कोरोना संक्रमित, जानें के क्या है दुनिया के दूसरे देशों का हाल…

भारत में सवाल उठते रहे हैं कि टेस्टिंग कम होने से कोरोना से संक्रमित लोगों की सही संख्या पता नहीं चल पा रही है। हालांकि, सरकार ने बीते दिनों क्षमता बढ़ाई है और एक हफ्ते पहले जहां रोजाना 15000 टेस्ट हो रहे थे वहीं अब 30000 से ज्यादा लोगों की जांच हो रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि करीब 26 लोगों के टेस्ट के बाद एक संक्रमित मिल रहा है। आइए जानें कि दुनिया के अन्य देशों में एक मरीज को ढृंढने के लिए कितने टेस्ट करने पड़ रहे।

देश टेस्ट

यूनाइटेड किंगडम 3.3
फ्रांस 4.7
अमेरिका 5.3
इटली 7.6
जापान 11.4
कनाडा 15.9
भारत 25.9
दक्षिण कोरिया 52.1
स्रोत : ऑक्सफोर्ड मार्टिन स्कूल

अहम तथ्य

1.दुनिया के ज्यादातर देशों में जांच से पहले मरने वालों का टेस्ट नहीं हो रहा, हो सकता है कि उनमें कई लोग संक्रमित हों

2.भारत में दूसरे देशों की तुलना करें तो अभी हालात काफी काबू में लेकिन ज्यादातर विशेषज्ञ ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करने की सलाह दे रहे

कई राज्यों में शुरू हो रहा रैपिड टेस्ट, आइए जानें सबकुछ

दिल्ली-उत्तराखंड समेत देश के कई राज्यों में आज से रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट शुरू होने जा रहा है। आइए जानें कि यह टेस्ट क्या है और क्यों इसकी जरूरत क्यों है?

1. क्या होता है रैपिड टेस्ट?

जब आप किसी वायरस या और किसी पैथोजन से संक्रमित होते हैं, तो शरीर उससे लड़ने के लिए एंटीबॉडीज बनाता है। रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट के जरिए इन्हीं एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है। खून में मौजूद एंटीबॉडी से ही पता चलता है कि किसी शख्स में कोरोना या किसी अन्य वायरस का संक्रमण है या नहीं।

2. कैसी होती है इसकी जांच ?

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक खांसी, जुकाम आदि के लक्षण दिखने पर पहले 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया जाता है और उसके बाद उस व्यक्ति के खून के नमूने लेकर एंटीबॉडी टेस्ट या सीरोलॉजिकल टेस्ट किए जाते हैं। जिसका परिणाम भी आधे घंटे के अंदर आ जाता है।

3. जांच में क्या पता करते हैं ?

इसमें देखते हैं कि संदिग्ध मरीज के खून में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी काम कर रही है या नहीं। वायरस से होने वाला संक्रमण पूरी तरह से खत्म हो जाने के बाद भी ये एंटीबॉडी शरीर में कुछ समय तक मौजूद रहते हैं। इससे डॉक्टरों को यह पहचानने में मदद मिलती है कि मरीज पहले संक्रमित था या नहीं।

4. पॉजिटिव मिले तो क्या होगा ?

अगर कोई व्यक्ति एंटीबॉडी टेस्ट में पॉजिटिव आता है तो डॉक्टरी परीक्षण के बाद उसका इलाज अस्पताल में होगा या फिर प्रोटोकॉल के तहत उसे आइसोलेशन में रखा जाएगा। इसके बाद सरकार उसके संपर्क में आए लोगों की तलाश करेगी। अगर टेस्ट नेगेटिव आता है तो व्यक्ति को होम-क्वारंटीन किया जाएगा या फिर पीसीआर टेस्ट किया जाएगा।

5. इसके परिणाम के क्या मायने होते हैं

जिस व्यक्ति का पहले टेस्ट न हुआ हो या वो खुद से ठीक हो गया हो, उसकी पहचान भी इस एंटीबॉडी टेस्ट से की जा सकती है। इससे सरकार को पता चलेगा कि जनसंख्या का कितना बड़ा हिंसा संक्रमित है या था।

6. देश में किन इलाकों में होगा?

इंडियन काउंसिल ऑफ रिसर्च ने बताया कि इस टेस्ट का हर क्षेत्र में इस्तेमाल का फायदा नहीं है। इसे केवल हॉटस्पॉट इलाकों, उन इलाकों के संपर्क में आए लोगों और इनक्यूबेशन सेंटर में रह रहे लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

7. क्या सब लोग करा सकते हैं जांच

बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कांफ्रेंस में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने कहा था कि अभी किट की कुछ कमी है। आम जन इस रैपिड टेस्ट की मांग न करें। इसका इस्तेमाल कोरोना की जांच के लिए नहीं बल्कि महामारी के प्रसार का पता लगाने के लिए किया जाएगा।

8. क्या इससे बीमारी की पहचान होती है?

रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट बीमारी की पहचान के लिए नहीं होता। यह टेस्ट सिर्फ ऐसे लोगों की पहचान के लिए है जिनमें लक्षण दिख रहे हों। एंटीबॉडी टेस्ट नेगेटिव आने का यह मतलब नहीं कि व्यक्ति को बीमारी या संक्रमण नहीं है।

9. इसकी जरूरत क्यों ?

अभी तक टेस्ट करने के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाता था। इसमें गले या नाक से एक स्वैब के जरिए सैंपल लिया जाता है। ये टेस्ट महंगे होते हैं और समय भी काफी लेते हैं। वहीं, रैपिड टेस्ट की कीमत कम है और परिणाम भी जल्दी मिलता है।

10. अब तक कौन टेस्ट हो रहा था?

अभी तक कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए जेनेटिक टेस्ट किया जाता है, जिसमें रूई के फाहे की मदद से मुंह के रास्ते से श्वास नली के निचले हिस्सा में मौजूद तरल पदार्थ का नमूना लिया जाता है। लॉकडाउन के दौरान एंटीबॉडी टेस्ट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है क्योंकि इसका इस्तेमाल उनलोगों की पहचान के लिए किया जा रहा है, जिनमें कोरोना का खतरा है।

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