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स्वतंत्रता दिवस 2020 : आखिरी क्यों लाल किले पर ही देश केे प्रधानमंत्री फहराते हैं तिरंगा ? आइए जानें किले का रंग लाल कैसे हुआ…

15 अगस्त के दिन गली नुक्कड़ और चौराहों पर देशभक्ति गीतों की स्वर लहरियां बह रही हैं। आज़ादी के इस पर्व में प्रत्येक भारत वासी शरीक होता है और अपने अपने अंदाज में इस दिन को जीता है।

आज़ादी से लेकर आज के दिन तक स्वतन्त्रता दिवस पर दिल्ली के लालकिले पर प्रधानमंत्री द्वारा तिरंगा फहराया जाता है। लेकिन आपके मन मे एक प्रश्न जरूर उठता होगा कि तिरंगा फहराने के लिए आखिर लालकिला ही क्यों? अन्य ऐतिहासिक महत्व की इमारतें भी हैं जहाँ हमारा प्यारा तिरंगा लहरा सकता है। आइये आपको हम लालकिला के इतिहास के बारे में पूरे विस्तार से बताते हैं।

ये तो सभी को पता हैं कि लाल किले का रंग लाल हैं। इसलिए उसका नाम भी लाल किला पड़ गया, लेकिन आपको बता दें एक समय ऐसा भी था जब लाल किले का रंग सफ़ेद हुआ करता था। शुरू में इसे चूने के पत्थरों से बनाया गया था लेकिन अंग्रेजो के शासनकाल में लाल किला अपनी चमक खोने लगा था और इसलिए इस पर लाल रंग पुतवा दिया था।

10 मई 1857 को मेरठ में क्रांति की शुरुआत हुईं और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाहियों ने अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ़ खुला विद्रोह किया था। 1857 में हुई क्रांति के दौरान अंग्रेजो ने अपना गुस्सा निकालने के लिए लाल किले के कई हिस्सों को तबाह कर दिया था और कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन पंहुचा दिया था।

जब भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली थी। तब 15 अगस्त 1947 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने सबसे पहले लाल किले पर ही आजादी का ऐलान किया था। इसके बाद से ही लाल किला भारतीय सेना का गढ़ बन गया और 22 दिसंबर 2003 को इस इमारत को भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग को सौंप दिया था।

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