देशस्वास्थ्य

जानिए कितने दिनों में आती है कोरोना टेस्ट रिपोर्ट्स, किस तरह होती है इस वायरस की जांच…और कितने तरीकों से लिए जाते हैं सैम्पल

आज के समय में बीमारी हो या कोई आपदा दोनों ही मानव जीवन पर संकट बन ही जाती है. जिसमे से एक है कोरोना वायरस यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका अभी तक कोई तोड़ नहीं मिल पाया है. वहीं इस वायरस की चपेट में आने से 2 लाख 52 हजार से अधिक मौते हो चुकी है, जबकि लाखों लोग इस वायरस से संक्रमित हुए है. ऐसे में वैज्ञानिकों के लिए यह कहना जरा मुश्किल सा है कि इस बीमारी से कब तक निजात मिल पाएगा.

इन 5 तरीकों से लिए जाते हैं सैम्पल: संदिग्ध व्यक्ति के 5 तरह के टेस्ट किए जाते हैं. जिसमें ए स्वाब टेस्ट, ए नसल एस्पिरेट, ए ट्रेचिएल एस्पिरेट, म्युकस या बलगम टेस्ट, ब्लड टेस्ट शामिल हैं. ए स्वाब टेस्ट की बात करें तो इसमें कॉटन के बड को नाक और गले में डाला जाता है, जिससे बड पर नाक और गले का तरल आ जाता है. वहीं ए नसल एस्पिरेट में नाक के छेद से एक स्लाइन अंदर डाली जाती है, जिससे सैंपल कलेक्ट कर लिया जाता है. वहीं ए ट्रेचिएल एस्पिरेट टेस्ट में ब्रोंकोस्कोप ट्यूब को फेफड़ों में डाला जाता है, वहां से सैंपल लिया जाता है. चौथी जांच बलगम से ली जाती है, इससे भी फेफड़ों की स्थिति पता चलती है. पांचवी जांच में संदिग्ध व्यक्ति का ब्लड सैंपल लिया जाता है. हालांकि कोरोना की जांच डॉक्टर के परामर्श पर भी आधारित होती है. जरूरी नहीं कि आपकी पांचों जांच की जाए.

इस तरह से होती है लैब में जांच: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार कोरोना में पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) टेस्ट होता है. इसको सरकार की ओर से प्रमाणित लैब से ही कराया जाता है. पीसीआर टेस्ट में गले और सांस लेने वाली नली के तरल पदार्थ के टेस्ट लिए जाते हैं. इस तरह की जांच की प्रक्रिया इंफ्लुएंजा और एन1एच1 की जांच में भी होती है. अब पीसीआर टेस्ट की बात करें तो इसमें वायरस के डीएनए की कॉपी बनाई जाती है. ‘पोलीमर’ उन एंजाइमों को कहा जाता है जो डीएनए की कॉपी बनाते हैं. वहीं ‘चेन रिएक्शन’ में डीएनए के हिस्से तेजी से कॉपी किए जाते हैं- जैसे एक को दो में कॉपी किया जाता है, दो को चार में कॉपी किया जाता है और इसी तरह ये क्रम चलता रहता है. इस विधि का आविष्कार अमेरिका के जैव रसायन विज्ञानी कैरी मुलिस ने किया था. बाद में उन्हें इस उत्कृष्ट कार्य के लिए रसायन विज्ञान का नोबल पुरस्कार भी दिया गया था.

जांच में कितना समय लगता है: सैम्पल कलेक्शन और जांच रिपोर्ट का समय अलग-अलग होता है. लैब की ओर से किसी सैम्पल की जांच की प्रकिया में पहले 6 घंटे का वक्त लग जाता था, लेकिन रोजाना हो रहे बदलावों के चलते इस वक्त ये टेस्ट 4 घंटे में ही पूरा हो जाता है. अब इन नमूनों की जांच रियल टाइम पीसीआर विधि से होती है. इसलिए समय में कमी आई है.

Related Articles

Back to top button
Close
Close