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आजादी के 70 साल बाद भी अंग्रेजों की निशानियां अपने कंधे पर ढो रहे भारतीय पुलिस वाले

आजादी के 70 साल बाद भी अंग्रेजों की निशानियां अपने कंधे पर ढो रहे भारतीय पुलिस वाले

 भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुए 70 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी पुलिस की वर्दी पर अंग्रेजों के निशान राज कर रहे हैं। भले ही भारतीय पुलिस जनता की सेवा कर रही है, लेकिन उसकी वर्दी अंग्रेजों की देन है, जिन्होंने विद्रोह और आजादी की लड़ाई लड़ने वालों के दबाने की नीयत से पुलिस फोर्स गठित की थी।

आपको बता दें कि भारतीय पुलिस फोर्स में अधिकतर राज्यों की पुलिस के कंधे पर लाल-नीले रंगा के रिबन का प्रयोग करते हैं, जो ब्रिटिश झंडे का प्रतीक है। वहीं कंधे पर लगे सितारे भी अंग्रेजों की ही निशानी है। पूर्व पुलिस अधिकारी बताते हैं कि सरकार से लेकर आला-अधिकारी सब जानते हैं कि ये पांच मुंह वाले सितारे और रिबन अंग्रेजों की निशानी है।  वे बताते हैं कि जब भारत गुलाम था उस समय अंग्रेजों ने विद्रोह को दबाने के लिए फौज बनाई थी, जिसके कंधों पर यूनियन जैक यानी ब्रिटिश हुकूमत के सिंबल के रूप में ये बैज लगाए थे। इसी तरह अफसरों के कंधों पर नजर आने वाले पांच मुंह वाले स्टार भी अंग्रेजों का प्रतीक हैं।

एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने बताया उस जमाने में पांच उप-महाद्वीपों पर अंग्रेज राज करते थे, इसलिए उन्होंने पांच कोण वाले स्टार तैयार किए, जो आज भी पुलिस की वर्दी में सज रखे हैं। वे बताते हैं कि सभी पुलिस अधिकारी और सरकारें इस बात को अच्छे से जानते हैं लेकिन कोई भी इसे हटाने की पहल नहीं करता। वो बताते हैं कि पुलिस की खाकी वर्दी भी अंग्रेजों की ही देन है, लेकिन आज के समय में ज्यादातर पुलिस वाले इस रंग को पसंद करने लगे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि खाकी रंग जल्दी मैला नहीं होता और लगातार अगर 2-4 दिन ड्यूटी करनी भी पड़ जाए तो वर्दी मैली नहीं लगती।

इतिहासकार बताते हैं कि भारत पर जिस समय ब्रिटिश राज था, उस दौरान अंग्रेजों की पुलिस वर्दी सफेद होती थी, जो भारत में धूल-मिट्टी से जल्दी मैली होती थी। सर हैरी बर्नेट लम्सडेन ने 1847 में पहली बार खाकी वर्दी का खाका पेश किया था और उसके बाद से ही ये रंग पुलिस की पहचान बन गया।

 हाल ही में नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के लिए वर्दी डिजाइन करने का काम सौंपा गया है। ब्यूरो ऑफ रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट के सहयोग से वर्दी के 9 नमूने तैयार किए गए हैं। इसमें शर्ट, ट्राउजर, बेल्ट, टोपी, जूते और जैकेट शामिल हैं। इसे सभी राज्यों की पुलिस के साथ साझा किया गया है ताकि वे अपने हिसाब से चयन कर सकें। 9 राज्यों से मिले फीडबैक में मौजूदा वर्दी के साथ कई समस्याएं सामने आई हैं। जैसे पुलिस की वर्दी बहुत मोटी है, जो गर्मी में दिक्कत करती है। वर्दी में मोबाइल, पैन, दस्तावेज, हथकड़ी, चाबी आदि रखने की भी पर्याप्त जगह नहीं होती।

पुलिस वाले बताते हैं कि टोपी ऊनी होने की वजह से गर्मियों में सिर दर्द हो जाता है। वहीं बेल्ट इतनी चौड़ी है कि झुकने पर कमर में अटक जाती है। दूसरे देशों में पुलिस की बेल्ट में सेलफोन, हथकड़ी और चाबियां लगाने की जगह होती है, लेकिन इन बेल्टों में ऐसा कोई विकल्प नहीं है।

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