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तिहाड़ जेल में कैदियों के बीच खूनी संघर्ष, पुलिसकर्मियों को भी बनाया निशाना

एशिया की सबसे बड़ी एवं अति सुरक्षित तिहाड़ जेल में कैदियों ने खूनी खेल खेला। कैदियों के कई गुट पहले आपस में भिड़ गए और जब उन्हें काबू करने का प्रयास किया, तो कैदियों ने जेल कर्मियों और तमिलनाडु सिक्योरिटी पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। बेकाबू कैदियों पर काबू पाने के लिए इमरजेंसी सायरन बजाना पड़ा। मौके पर पहुंचे त्वरित कार्रवाई दस्ते ने कैदियों को काबू किया और उन्हें वापस बैरक में बंद किया गया। हमले में १३ जेल कर्मी व तमिलनाडु सिक्योरिटी पुलिसकर्मी जख्मी हुए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी।

– क्या है मामला

जेल प्रशासन की शिकायत पर कैदियों के खिलाफ षड्यंत्र रचकर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और मारपीट करने का केस दर्ज किया। घटना १४ सितंबर की है। सुबह जेल परिसर में बने मंदिर के पास कई कैदी मौजूद थे। उनके बीच अचानक लड़ाई शुरू हो गई। उसके बाद कैदी कई गुटों में बंट गए और इस कदर उग्र हो गए कि वहां मौजूद जेल अधिकारियों के लिए उन पर काबू पाना मुश्किल हो गया। कैदियों ने उन्हें काबू कर रहे जेल कर्मियों और तमिलनाडु सिक्योरिटी पुलिसकर्मियों पर हमला किया। स्थिति बेकाबू होती देख इमरजेंसी सायरन बजा दिया और मौके पर त्वरित कार्रवाई दस्ते को बुलाया। साथ ही जेल के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। हमले में घायल अनीश, रवि, प्रवीण, गौरव, सुनील, आशीष, दिनेश, अमित, थिरूमलई, कनग गेरई, इशाक, अरुण कुमार और थीयंत को अस्पताल भेजा। वहीं कैदियों को बड़ी मुश्किल से काबू करने के बाद उन्हें बैरक में बंद कर दिया गया। जेल प्रशासन की तरफ से हरि नगर थाने में इस बाबत शिकायत दी है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है।

– जेल में हो रही ड्रग्स सप्लाई

एक तरफ तिहाड़ में कैदियों को सुधारने की मुहिम चलाई जा रही है, दूसरी ओर जेल के भीतर ड्रग्स आसानी से कैदियों तक पहुंच रही है। जांच में पता चला कि इस मामले की शुरुआत जेल में पहुंच रहे नशे के सामान को लेकर हुई। १२ सितंबर की सुबह तिहाड़ जेल-संख्या ३ में ३ विचाराधीन कैदी जमाल, फैजान और वीरेंद्र नशे की ओवरडोज की वजह से बेसुध पाए गए। तीनों को डीडीयू अस्पताल में भर्ती कराया। वापस लौटने पर तीनों को अलग-अलग सेल में डाल दिया। जमाल इस बात से खफा होकर १३ सितंबर को गाली गलौज करने लगा। जब जेल अधिकारियों ने उसे समझाने की कोशिश की, तो उन्हें फंसाने की धमकी देकर अपने सिर को दीवार पर मारने लगा। जेल अधिकारियों ने उसे किसी तरह से काबू किया। रात में फिर से जमाल और वीरेंद्र बेकाबू हो गए और खुद को घायल करने के साथ-साथ दूसरे कैदियों को भी घायल किया। अगले दिन सभी कैदियों ने मिलकर जमकर बवाल किया।

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