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बिलासपुर नगर निगम का कारनामा,शहर में घुमने वाले जानवरों की गाड़ी में इंसानो को ढोया जा रहा

नगर निगम अमला लावारिस गायों को पकड़कर कांजी हाऊस में छोडऩे वाले वाहन काऊकेचर में गरीब जनता को बिठाकर उनसे उठक-बैठक लगवा रहे हैं,और शहर से बाहर छोड़कर आ रहे हैं। गरीब जनता के साथ पशुता जैसा व्यवहार को लेकर बवाल मच रहा है। हाईकोर्ट अधिवक्ता  सलीम काजी सहित शहर के कई वकीलों ने इसे मानव अधिकार का उल्लंघन बताया है, तो कांग्रेसी नेता इस तरह के कृत्य का भारी विरोध कर रहे हैं।

खुले में शौच को रोकने के लिए नगर निगम द्वारा अपने आवारा पशुओं को पकड़ कर कांजी हाउस भेजने वाले अमले की ड्यूटी रोज सुबह तड़के ही अरपा नदी के किनारे लगाया गया है। यह अमला शौच के लिए जाने वाले लोगों को रोकने के साथ ही उन्हें सुलभ शौचालय में जाने की सलाह देता है। नगर निगम अधिकारियों का यही कहना है, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरित है। नगर निगम के अमले द्वारा खुले में शौच को रोकने के लिए जो किया जा रहा है उसको लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी भारी विरोध जताया है।

शहर की सड़कों पर लावारिस घुमने और बीच सड़क में झूंड के रुप में बैठकर यातायात को बाधित करने वाले तथा दुर्घटना का कारण बन रहे लावारिस पशुओं को नगर निगम द्वारा कांजी हाऊस में सिर्फ इसलिए नहीं भेजा जा रहा है कि लावारिस पशुओं को ले जाने वाला वाहन काऊकेचर खाली नहीं है। काऊकेचर को सुबह अरपा नदी के किनारे खड़ी कर शौच के लिए जा रहे लोगों को पकड़कर उन्हें काऊकेचर में बिठाया जाता है और फिर शहर से कई किलोमीटर दूर उन्हें ले जाकर छोड़ दिया जाता है।

खुले में शौच के लिए जाने वाले गरीब तबके के और श्रमिक वर्ग के लोगों को ऐसा नहीं करने के लिए उनसे कान पकड़कर उठक-बैठक भी लगवाया जाता है। सवाल यह उठता है कि ऐसा दंड देने का अधिकार निगम के अमले को आखिर किसने दिया और किस कानून में लिखा है या स्वच्छ भारत अभियान में ऐसा कौन का नियम पास किया गया है कि खुले में शौच करने वालों को पशुओं के वाहन में पशुओं की तरह ठूंसकर बिठाया जाए और उन्हें पशुओं की ही तरह शहर के बाहर छोड़ दिया जाए।

इस मामले में निगम आयुक्त सौमिलरंजन चौबे का कहना है कि निगम का अमला खुले में शौच जाने वाले लोगों को सुलभ शौचालय तक पहुंचाकर आते हैं। नगर निगम द्वारा ध्वनि प्रसारण यंत्रों के माध्यम से पूरे शहर में यह मुनादी भी कराई जा रही है कि खुले में शौच करना दंडनीय अपराध है, लेकिन दंड देने के अधिकारी निगम का अमला तो नहीं है।

खुले में शौच से मना करने के लिए निगम द्वारा पॉश इलाकों में भी मुनादी कराई जा रही है। शहर में मुख्यत: चांटीडीह, सरकंडा, कोनी रोड, तालापारा, मगरपारा आदि क्षेत्रों में गरीब तबके के लोग रहते हैं।ज्यादातर लोगों का खुद का शौचालय नहीं है। सरकार की योजनाओं में भी ऐसे लोगों को पर्याप्त लाभ नहीं मिला है। खुले में शौच जाते-जाते ऐसे वर्ग की पूरी जिंदगी बीत गई है।

 ऐसे मोहल्लों में सुलभ शौचालय तो बनाया गया है तथा ज्यादातर लोगों का पास भी बनवा दिया गया है, लेकिन शहर में ऐसे लोगों की संख्या बहुत है जो नियमित रुप से सुबह-सुबह अरपा नदी के किनारे खुले में शौच जाना पसंद करते हैं। ऐसे लोगों को अचानक ही खुले में शौच के लिए जाने से मना करते हुए उन्हें दंड देना या काऊकेचर में बिठाकर शहर के बाहर छोडऩा उनके साथ अन्याय ही है।

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