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सुप्रीम कोर्ट के बैन से 100 साल पहले ही इन गांवों ने ले लिया था पटाखे न जलाने का फैसला!

सुप्रीम कोर्ट के बैन से 100 साल पहले ही इन गांवों ने ले लिया था पटाखे न जलाने का फैसला!
दिवाली के मौके पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर बैन लगा दिया था। इससे तमाम पटाखा व्यापारियों के साथ ही आम लोग भी परेशान दिखे। सभी को लगा कि क्या इस बार दिवाली बिना पटाखों के ही मनाई जाएगी। लेकिन दिवाली के दिन लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। मगर आज हम आपको देश के एक ऐसे राज्य के कुछ गांवों  के बारे में बताने जा रहे हैं जहां 100 साल पहले ही दिवाली पर पटाखे न जलाने का प्रण ले लिया गया था। 
ये गांव तमिलनाड़ु में हैं जहां 100 साल से ही दिवाली के दिन पटाखे नहीं जलाए जा रहे हैं। यहां के कई गांवों के लोगों ने चिड़ियों और चमगादड़ों को होने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए दिवाली पर आतिशबाजी न करने का फैसला लिया था।
तिरूनलवेली के कूतनकुलम गांव में पक्षी विहार है और वहां के लोग लंबे समय से दिवाली के दिन पटाखे नहीं जलाए जाते। इतना ही नहीं इस गांव के लोग पक्षियों को तेज आवाज से होने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए धार्मिक स्थलों और व्यक्तिगत समारोहों में भी तेज आवाज वाले लाऊडस्पीकर लगाने से बचते नजर आते हैं।
इसके साथ ही तमिलानाड़ु के सलेम पेराम्बुर के करीब वव्वाल तोप्पु गांव और कांचीपुरम के निकट विशार के लोग पटाखे इसलिए नहीं चलाते हैं ताकि यहां बसे चमगादड़ों को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो। पेराम्बुर के लोगों के मुताबिक,पटाखे नहीं चलाने का फैसला करीब 100 साल पहले लिया गया था। तभी से ही ये परंपरा आज भी जारी है।

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