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छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का राजनैतिक जीवन…युकां जिलाध्यक्ष से राजनीति में रखा कदम…पांच साल तक कांग्रेस के सच्चे सिपाही की तरह भाजपा से लड़ते रहे…जानिए भूपेश के बारे में…

बिलासपुर/ युवक कांग्रेस दुर्ग के जिलाध्यक्ष के रूप में राजनैतिक जीवन की शुरुआत की। दाऊ चंद्राकर, प्यारेलाल बेलचंदन जैसे मध्यप्रदेश के दिग्गज ओबीसी नेताओं की छत्रछाया में राजनीति में आगे बढ़े।

दिग्विजय सिंह ने पहली बार विधानसभा लड़ने का प्रस्ताव दिया। अचानक चुनाव लड़ने के लिए बघेल ख़ुद को तैयार नहीं कर पा रहे थे, पर दिग्विजय सिंह का आदेश माना और चुनाव लड़ कर विधायक बने।

छत्तीसगढ़ राज्य अलग होने पर कांग्रेस आलाकमान की पसंद होने के कारण जोगी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बनाए गए, किन्तु जोगी की नीतियों से सहमत नहीं थे। अमित जोगी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया और जोगी परिवार से राजनैतिक मतभेद शुरू की।

विद्याचरण शुक्ल ने 2003 के चुनाव में बघेल के भतीजे को NCP से टिकट दिया, पर उन्होंने चुनाव जीत कर स्वयं को बड़ा नेता साबित किया।

स्व. राजेन्द्र शुक्ला के देहांत के बाद कोटा उपचुनाव में पर्यवेक्षक बनाए गए। संगठन के प्रत्याशी सुनील शुक्ल को चुनाव में वर्तमान प्रदेश महामंत्री अटल श्रीवास्तव की मदद से फण्ड मैनेज कर इन्होंने दिया। कहा जाता है कि यही से अटल श्रीवास्तव से इनके संबंध प्रारम्भ हुए।

राहुल गांधी ने इन्हें फ़ोन कर प्रदेश अध्यक्ष बनने कहा था। इन्होंने नेताप्रतिपक्ष बनने की इच्छा जाहिर की तो जवाब मिला कि आपसे पूछा नहीं, बताया जा रहा है। आदेश मान कांटे भरा ताज स्वीकार किया।

अध्यक्ष बनते ही सबको निपटाने वाले अजीत जोगी को उन्होंने पार्टी से बाहर किया। इस काम ने उन्हें छत्तीसगढ़ में लौह पुरूष के रूप में स्थापित किया।

किसानों, युवाओं, ST, SC,OBC वर्ग, शासकीय कर्मचारियों को साधकर चुनाव जीतने का फॉर्मूला गढ़ा।

विरोधियों ने चुनाव के पहले टिकट वितरण में निपटाने का काम किया, पर वे कांग्रेस के सच्चे सिपाही की तरह लड़ते रहे।

कांग्रेस को 68 सीटें जीतने में उनकी मुख्य भूमिका रही। आज इसका परिसाद मिला।

बिलासपुर जिले में अटल श्रीवास्तव इनके हैं सबसे खास। उनके टिकट के लिए अंतिम समय तक प्रयास किया।

कार्यकर्ताओं के लिए लड़ने के लिए जाने जाते हैं। इसलिए कार्यकर्ताओं में हर्ष का माहौल है।

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