ताजाखबर36गढ़ का विश्लेषण: बिलासपुर जिले की सात विधानसभाओं का आंकलन… जानिए कहां भाजपा और कहां कांग्रेस को बढ़त… आप और जोगी कांग्रेस का कहां है प्रभाव…

बिलासपुर/ विधानसभा चुनाव की मतगणना को महज दो दिन शेष रह गए हैं। अब तक सारी बड़ी सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल आ चुके हैं। कई सर्वे एजेंसियां कांग्रेस की सरकार बना रही हैं तो कई एजेंसियां भाजपा की सरकार रिपीट कर रही हैं। ताजाखबर36गढ़.कॉम ने भी बिलासपुर जिले की सात विधानसभा सीटों का विश्लेषण किया। इसमें मीडिया, राजनीति और समाज से जुड़े विशेषज्ञों की राय ली गई। सभी के अपने-अपने तर्क थे, पर समानता यह कि जिले में कांग्रेस को बढ़त मिलेगी। भाजपा दो से तीन सीटें जीत सकती हैं। जोगी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का प्रभाव भी एक-दो सीटों पर रहेगा।

बिलासपुर विधानसभा: कांग्रेस को बढ़त

बिलासपुर विधानसभा प्रदेश की हाईप्रोफाइल सीटों में से एक है। हर चुनाव में यहां के परिणाम पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर लगी रहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार पूरे प्रदेश में भाजपा के खिलाफ एंटीइनकंबेंसी का माहौल था। बिलासपुर विधानसभा भी इससे अछूता नहीं रही। सीवरेज हो फिर सड़कों के धंसने का मामला… पब्लिक इससे सालों से परेशान है। इस बार यहां पब्लिक ने चुनाव लड़ा है। हालांकि इस बार भी कांग्रेस के खिलाफ कांग्रेसियों ने काम किया। इसकी शिकायत भी प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक पहुंच गई है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दो विशेष वर्ग, जो अब तक बीजेपी के वोट बैंक हुआ करते थे। इस बार 80 प्रतिशत का मन बदल गया और वे कांग्रेस के पक्ष काम करते रहे। दोनों वर्गों की संख्या करीब 50 हजार से अधिक है। पर ये भी सच है कि मैनेजमेंट में माहिर भाजपा प्रत्याशी अमर अग्रवाल को मात दे पाना इतना आसान नहीं, क्योंकि उनके मैनेजमेंट का लोहा प्रदेश ही नहीं, देश के राजनीतिज्ञ मानते हैं। फिर भी बिलासपुर विधानसभा में जो हवा चली, उससे यह सीट भाजपा के हाथ से खिसकती नजर आ रही है।

बेलतरा विधानसभा: जोगी कांग्रेस डालेगा असर

बेलतरा एक ऐसी विधानसभा है, जहां का 40 प्रतिशत हिस्सा शहरी और 60 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण है। यहां से कांग्रेस से राजेंद्र कुमार साहू, भाजपा से रजनीश सिंह और जोगी कांग्रेस से अनिल टाह के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। क्षेत्र के वोटरों के लिए राजेंद्र और रजनीश सिंह नए चेहरे थे, लेकिन इनके पास पार्टी का सिम्बॉल था। वहीं अनिल टाह बिलासपुर शहर से लगे क्षेत्र के लिए पुराने चेहरे हैं, पर उनकी पार्टी का सिम्बाल नया था। अनिल टाह ने चार माह तक क्षेत्र में खूब पसीना बहाया और वोटरों का विश्वास हासिल करने की कोशिश की। दूसरी ओर पार्टियों के बैनर तले रजनीश सिंह और राजेंद्र साहू ने कम समय में सही, पर कोई कसर नहीं छोड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यहां किसी की राह आसान नहीं दिख रही है। दरअसल, अब तक तीन विधानसभा चुनावों में शहरी बेल्ट से ही भाजपा जीतती आई है। कांग्रेस को ग्रामीण बेल्ट में बढ़त मिलती रही है। इस बार अनिल टाह के मैदान में होने से शहरी के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में अलग ही माहौल बन गया था। कहा जा रहा है कि जोगी कांग्रेस प्रत्याशी जिस पार्टी के वोट बैंक पर सेंध लगाने में कामयाब हुए होंगे। विरोधी पार्टी को इसका फायदा मिलेगा। यानी कि उन्हें मिले वोटों का प्रतिशत ही तय करेगा कि यहां किसके सिर ताज सजेगा।

बिल्हा विधानसभा: कांग्रेस, बीजेपी और आप के बीच त्रिकोणीय मुकाबला

बिल्हा विधानसभा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक का गढ़ है। यहां से सियाराम कौशिक विधायक हैं, जिन्होंने बीते विधानसभा चुनाव में स्पीकर रहे धरमलाल को हराया था। इस बार ये दोनों धुर राजनीतिक विरोधी आमने-सामने तो थे। ये अलग बात है कि इस बार सियाराम जोगी कांग्रेस से प्रत्याशी रहे। दूसरी ओर, मैदान में आम आदमी पार्टी से सरदार जसबीर सिंग और कांग्रेस से राजेंद्र शुक्ला थे। बिल्हा विधानसभा में व्याप्त समस्याओं को लेकर आप प्रत्याशी जसबीर सिंग ने खूब आवाज उठाई। छह माह तक वे जनता को जागृत करते रहे। चाहे पेयजल समस्या हो, शौचालय और आवास निर्माण में घोटाला हो, राशन, पेंशन का मामला हो या फिर फसल मुआवजा का… सारी समस्याओं को लेकर वे जनता के साथ प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाते रहे। भाजपा प्रत्याशी धरमलाल और कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र शुक्ला के पास कार्यकर्ताओं की फौज थी, जिन्होंने अपने आकाओं को जिताने के लिए खूब मेहनत की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने जहां सरकार की उपलब्धियों को गिनाया तो कांग्रेस समर्थकों ने सरकार की असफलताओं को घर-घर तक पहुंचाया। सियाराम कौशिक समर्थकों के पास मुद्दों की कमी थी। बहरहाल राजनीतिक पंडित कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी के प्रयास से यदि वोटर जागरूक हो गए हैं तो यहां के परिणाम चौंकाने वाले आएंगे।

तखतपुर विधानसभा: कांग्रेस को बढ़त के आसार

तखतपुर विधानसभा में भाजपा से हर्षिता पांडेय तो कांग्रेस से रश्मि सिंह चुनाव मैदान में थीं। जोगी कांग्रेस से संतोष कौशिक भाग्य आजमा रहे हैं। इस विधानसभा में आम आदमी पार्टी का कोई प्रभाव नहीं दिखा। जोगी कांग्रेस प्रत्याशी संतोष कौशिक प्रचार के मामले में सभी को पछाड़ चुके हैं। इसका कारण भी साफ है, चार माह पहले ही उन्हें प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था, जबकि कांग्रेस और भाजपा की उम्मीदवारों को प्रचार के लिए बहुत कम समय मिला। भाजपा सरकार के खिलाफ जिस तरह विधानसभा के गांवों में माहौल था, उससे तो हर्षिता पांडेय की राह आसान नहीं दिख रही है। अब कांग्रेस की टक्कर में सिर्फ जोगी कांग्रेस प्रत्याशी संतोष कौशिक बच गए थे। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि पिछले चुनाव की तरह इस बार संतोष कौशिक के घर बैठने की अफवाह फैल गई थी। ऐन समय में उन्हें अपने समर्थकों के साथ ही वोटरों को विश्वास दिलाना पड़ा था कि वे चुनाव मैदान में हैं। इस अफवाह का फायदा कांग्रेस को बहुत हद तक मिला होगा। यही वजह है कि यहां कांग्रेस को बढ़त के संकेत मिल रहे हैं।

मस्तूरी विधानसभा: भाजपा की नैया हो सकती है पार

मस्तूरी विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया और भाजपा से डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी आमने-सामने थे। बसपा से भारद्वाज चुनाव मैदान में थे। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि क्षेत्र में भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल तो था, विधायक दिलीप लहरिया के कामकाज से भी लोग खासे नाराज थे। विकल्प के तौर पर बसपा प्रत्याशी सामने थे, लेकिन वे अपनी बातों को दमखम से वोटरों तक पहुंचाने में नाकामयाब रहे। वोटरों के बीच चर्चा यह थी कि जब डॉ. बांधी यहां विधायक थे, तब कुछ तो काम हुआ था। वोटरों की यही सोच भाजपा की नैया पार करा रही है।

कोटा विधानसभा: कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोटा विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर है। इनके बीच जीत-हार का फैसला जोगी कांग्रेस को मिले वोट करेगा। दरअसल, जोगी कांग्रेस से डॉ. रेणु जोगी चुनाव मैदान में हैं, जो पिछली बार कांग्रेस के टिकट से विधानसभा पहुंची थीं। इस बार कांग्रेस ने उनके बजाय पूर्व डीएसपी विभोर सिंह पर भरोसा जताया। भाजपा ने काशी साहू को मैदान में उतारा। तीनों के बीच प्रचार युद्ध और क्षेत्र के माहौल से यही हवा चल रही है कि यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर है। दरअसल, आजादी के बाद से यहां से कांग्रेस कभी नहीं हारी। इस बार डॉ. जोगी के मैदान में रहने और कांग्रेस छोड़कर जोगी कांग्रेसी में आए कार्यकर्ताओं के कारण कांग्रेस की स्थिति थोड़ी कमजोर जरूर हुई है। यही वजह है कि कांग्रेस के अपराजय गढ़ में इस बार कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर है।

मरवाही विधानसभा: विश्लेषक भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं

मरवाही विधानसभा पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का गढ़ है। यहां से इस बार वे खुद ही चुनाव मैदान में थे। कांग्रेस से गुलाब सिंह तो भाजपा से अर्चना पोर्ते किस्मत आजमा रही है। प्रदेश की यह पहली विधानसभा सीट है, जहां की जनता पार्टी के बजाय व्यक्ति पर भरोसा करती रही है। इसलिए इस विधानसभा में हार-जीत का आंकलन करने में विश्लेषक भी पीछे रह गए हैं।

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