Fri. Jan 24th, 2020

बिलासपुर: चुनावी मैनेजमेंट गुरु अमर को हराने के बाद शैलेश पांडेय को मिल सकता है इनाम…हर सरकार में बिलासपुर को मंत्री पद देने का रहा है इतिहास…अब चौक-चौराहों पर छिड़ गई है ये चर्चा…

बिलासपुर। नगरीय प्रशासन और प्रदेश के कद्दावर मंत्री अमर अग्रवाल को उनके गढ़ में मात देने के बाद बिलासपुर के नए विधायक शैलेश पांडेय का कद एकाएक बढ़ गया है। अब चर्चा इस बात को लेकर छिड़ गई है कि प्रदेश में चुनावी मैनेजमेंट में माहिर नेताजी को हराने पर शैलेश पांडेय को कांग्रेस सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। शिक्षाविद होने के नाते चर्चा तो यह भी है कि प्रदेश में शिक्षा विभाग का प्रभार भी मिल सकता है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा शहर बिलासपुर है। यहां हाईकोर्ट, रेलवे जोन, एसईसीएल मुख्यालय, संभागीय राजस्व कार्यालय, राजस्व मंडल जैसे बड़े कार्यालय हैं। राजनीति की दृष्टि से भी बिलासपुर का अपना अलग ही महत्व है। अविभाजित बिलासपुर (बिलासपुर और मुंगेली) जिले की बात करें तो यहां 9 विधानसभा सीटें हैं। विधानसभा चुनाव 2018 में यहां से कांग्रेस ने सिर्फ दो सीटें बिलासपुर और तखतपुर सीट जीती हैं। बिलासपुर विधानसभा की बात करें तो यह सीट नगरीय प्रशासन मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता अमर अग्रवाल का गढ़ बन चुकी थी। यहां से वे लगातार चार बार विधायक चुने गए और 15 साल के भाजपा के कार्यकाल में मंत्री रहे। चुनावी मैनेजमेंट में उनकी कोई सानी नहीं है। चुनावी मैनेजमेंट में उनका लोहा प्रदेश ही नहीं, देशभर में माना जाता है। चुनावी मैनेजमेंट गुरु के सामने सालभर पहले राजनीति में आए कांग्रेस नेता शैलेश पांडेय के लिए बड़ी चुनौतियां थीं। टिकट मिलने के बाद शहर कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोलकर परेशानी सो अलग बढ़ा दी थी, पर शैलेश पांडेय विचलित नहीं हुए और मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ियों की भांति अपने चाल चलते रहे। नतीजा सबके सामने है। भाजपा के कद्दावर मंत्री अग्रवाल को उन्होंने 11 हजार से अधिक वोटों से हरा दिया। भाजपा के लोगों ने कहां चूक की और कांग्रेस प्रत्याशी ने कहां से फायदा उठा लिया, यह भाजपाइयों के लिए सोच का विषय हो सकता है, लेकिन मंत्री अग्रवाल को हराने के बाद शैलेश पांडेय प्रदेश की राजनीतिक क्षितिज पर छा गए हैं। एक-दो दिनों में प्रदेश में नई सरकार का गठन हो जाएगा। इससे पहले अब राजनीति पर दिलचस्पी रखने वालों के बीच बहस छिड़ गई है। बहस इस बात की कि कद्दावर मंत्री को हराना आसान नहीं था। शैलेश पांडेय ने कैसा मैनेजमेंट किया, यह तो पता नहीं, पर उन्हें इस जीत का इनाम जरूर मिलेगा। वैसे भी अविभाजित बिलासपुर जिले से मात्र दो कांग्रेसी चुनाव जीतकर आए हैं। तखतपुर से चुनाव जीतने वाली रश्मि सिंह के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने जिन्हें हराया, उनका राजनीतिक कद उतना बड़ा नहीं था, जितना कि अमर अग्रवाल का। इसलिए शैलेश पांडेय का अधिकार बनता है कि उन्हें मंत्री पद से नवाजा जाए। वैसे भी प्रदेश की राजनीति में बिलासपुर जिले को मंत्री देने का इतिहास रहा है। जब छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ था, तब अजीत जोगी सीएम थे, जो बिलासपुर जिले के मरवाही से ताल्लुक रखते हैं। भाजपा सरकार के तीनों कार्यकाल में अमर अग्रवाल मंत्री रहे। उनके अलावा पुन्नूलाल मोहले, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी को भी मंत्री पद से नवाजा गया था। बद्रीधर दीवान विधानसभा उपाध्यक्ष रहे हैं। इस लिहाज से कहा जा रहा है कि बिलासपुर की झोली में मंत्री का पद तो गिरना तय है। बहरहाल, ये तो वक्त ही बताएगा कि कद्दावर मंत्री अग्रवाल को हराने वाले शैलेश पांडेय को सरकार में क्या जगह मिलती है।

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