राजनीति

फ्लैशबैक: 2020: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से अहमद पटेल तक, कोरोना की वजह से दुनिया छोड़ गए ये नेता…

साल 2020 बीतने में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। इस साल की सबसे बड़ी घटना जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया वह कोरोना महामारी थी। वैसे तो कोरोना वायरस 2019 में ही पहचान लिया गया था लेकिन इसका असर पूरी दुनिया ने 2020 में ही देखा और आज तक देख रहा है। कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित देशों में भारत भी शामिल है। कोरोना के चलते महीनों लंबे लगे लॉकडाउन में जहां अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई वहीं इस महामारी ने अब तक एक लाख से ज्यादा जिंदगियों को निगल लिया। आज हम उन नेताओं की बात करेंगे जो कोरोना के चलते इस दुनिया को अलविदा कह गए।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

जिन नेताओं को कोरोना हुआ और वह दुनिया को छोड़ गए उनमें सबसे बड़ा नाम पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का है। 84 वर्षीय प्रणब मुखर्जी को ब्रेन सर्जरी के लिए दिल्ली स्थित सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सर्जरी के बाद उनके कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी सामने आई। लगातार डॉक्टर पूर्व राष्ट्रपति के स्वास्थ्य की निगरानी करते रहे लेकिन उनकी हालत बिगड़ती गई और उन्होंने 31 अगस्त को आखिरी सांस ली। प्रणब मुखर्जी का नाम भारत के दिग्गज नेताओं में शुमार होता था। वे मनमोहन सिंह सरकार में वित्त मंत्री भी रहे थे।

केंद्रीय मंत्री सुरेश अंगड़ी

कोरोना वायरस ने केंद्र की मौजूदा सरकार में शामिल एक मंत्री को भी हमसे छीन लिया। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी का भी कोरोना वायरस के चलते निधन हो गया था। कर्नाटक के बेलगावी से सांसद अंगड़ी ने खुद ट्वीट करके अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी दी थी। 65 वर्षीय अंगड़ी 11 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे जिसके बाद उन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उनकी सेहत बिगड़ती गई और आखिरकार 23 अगस्त को उनका निधन हो गया।

कांग्रेस नेता अहमद पटेल

कोरोना का शिकार होने वाले नेताओं में कांग्रेस के अहमद पटेल भी थे। 71 वर्षीय अहमद पटेल को 25 नवम्बर को सुबह 3 बजे के करीब उनका निधन हो गया। पटेल लगभग एक महीने पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद उन्हें गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया। लंबे समय तक वह आईसीयू में रहे लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हो पाया। उनकी इच्छा के अनुसार गुजरात स्थित उनके गांव में माता-पिता की कब्र के पास दफनाया गया। अहमद पटेल कांग्रेस में सोनिया गांधी के सबसे करीबियों में शुमार थे।

असम के पूर्व सीएम तरूण गोगोई

नवम्बर में ही एक और नेता को कोरोना ने हमसे छीन लिया। असम के तीन बार मुख्यमंत्री रहे और कांग्रेस के दिग्गज नेता तरुण गोगोई का 23 नवम्बर को निधन हो गया। तरुण गोगोई को अक्टूबर में कोरोना हुआ था जिससे वे उबर आए थे। लेकिन जैसा कि अक्सर कोरोना केस में होता है, कोरोना तो चला जाता है और उसके चलते शरीर इतना कमजोर हो जाता है कि बहुत सारी मुश्किलें शुरू हो जाती हैं, वहीं 86 वर्षीय तरुण गोगोई के साथ भी हुआ। उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था जिसके बाद उन्हें गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में वेंटिलेटर पर रखा गया जहां उन्होंने आखिरी सांस ली।

पूर्व क्रिकेटर और राजनेता चेतन चौहान

उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान का भी कोरोना के चलते 16 अगस्त को निधन हो गया था। चौहान को जुलाई में कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। पहले उन्हें लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई में भर्ती कराया गया था लेकिन उनकी हालत बिगड़ने पर गुरुग्राम के मेदांता ले जाया गया। धीरे-धीरे उनके सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और आखिरकार 1 महीने बाद 16 अगस्त को उन्हें दिल का दौरान आया जिसमें वे बच न सके। चौहान यूपी सरकार में होमगार्ड मंत्री थे।

आंध्र प्रदेश से सांसद बल्ली दुर्गा प्रसाद

आंध्र प्रदेश के तिरुपति से सांसद बल्ली प्रसाद का दुर्ग का भी 16 सितम्बर को कोविड-19 के चलते निधन हो गया था। वे 64 वर्ष के थे। कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद दुर्ग को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका निधन हो गया था। प्रसाद आंध्र प्रदेश के नेल्लूर में गुडुर सीट से विधायक भी रहे थे। वे चार बार विधायक रहने के साथ ही राज्य के मंत्रीमण्डल में भी रहे। 2019 में वह वाईएसआर कांग्रेस के टिकट पर तिरुपति से सांसद बने थे।

राज्यसभा सांसद अशोक गस्ती

राज्यसभा के लिए चुने गए अशोक गस्ती का 18 सितम्बर को कोरोना के चलते निधन हो गया। गस्ती को निधन से कुछ दिन पहले ही कर्नाटक से राज्यसभा के लिए चुना गया था। वह एक भी दिन संसद नहीं पहुंच पाए थे। 55 वर्षीय गस्ती को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद 2 सितम्बर को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कोविड-19 के चलते उनकी हालत बिगड़ती गई। उन्हें निमोनिया हो गया था और धीरे-धीरे उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया जिसके चलते उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

कांग्रेस सांसद एच. वसंतकुमार

कांग्रेस नेता और तमिलनाडु के कन्याकुमारी से सांसद एच वसंतकुमार को भी कोरोना के चलते निधन हो गया था। कोरोना से संक्रमित होने के बाद उन्हें चेन्नई के अपोलो अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। उन्हें शुरू में कोविड निमोनिया हुआ फिर धीरे-धीरे उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया। कोविड से होने वाली मुश्किलों के चलते उनकी हालत बिगड़ती गई और 28 अगस्त को उनका निधन हो गया।

यूपी की मंत्री कमला रानी वरुण

यूपी सरकार में चेतन चौहान के अलावा एक और मंत्री कमला रानी वरुण का भी कोरोना के चलते निधन हुआ था। कानपुर के घाटमपुर से विधायक कमला रानी यूपी सरकार में एकमात्र महिला कैबिनेट मंत्री थीं। 18 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उन्हें लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई में भर्ती कराया गया। उन्हें डायबिटीज की समस्या थी जिसके चलते उन्हें दूसरी जटिलताएं भी शुरू हो गईं। उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। 2 अगस्त को कमला रानी ने आखिरी सांस ली।

रघुवंश प्रसाद सिंह

राष्ट्रीय जनता दल के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री रहे रघुवंश प्रसाद सिंह का भी 13 सितम्बर को निधन हो गया। वे जून में कोरोना से संक्रमित हुए थे लेकिन उस दौरान वे ठीक हो गए थे। बाद में सितम्बर में उन्हें कई सारी मुश्किलें आने पर दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया जहां उनकी तबीयत बिगड़ती गई। सांस लेने में परेशानी आने र उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा लेकिन वे चल बसे। अस्पताल के बेड से ही लालू प्रसाद यादव को चिठ्ठी लिखकर पार्टी से इस्तीफा देने के चलते उनकी काफी चर्चा हुई थी।

एमपी से विधायक गोवर्धन दांगी

मध्य प्रदेश के ब्यावरा से कांग्रेस विधायक गोवर्धन दांगी का 15 सितम्बर को कोरोना के चलते निधन हो गया। दांगी को कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भोपाल में भर्ती कराया था लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के मेदांता अस्पताल में ले जाया गया। यहां भी उनकी हालत ठीक न हो सकी और उनका निधन हो गया।

भाजपा विधायक किरन माहेश्वरी

भाजपा नेता और राजस्थान के राजसमंद क्षेत्र से विधायक किरन माहेश्वरी का कोरोना के चलते निधन हुआ था। वे राजसमंद से तीसरी बार विधानसभा सदस्य बनी थीं। इसके साथ ही वसुंधरा राजे सरकार में वह मंत्री भी रही थीं। राजस्थान में हुए निकाय चुनावों के दौरान वह संक्रमण की चपेट में आई थीं जिसके बाद उन्हें गुरुग्राम के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 30 नवम्बर को उनका निधन हो गया।

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