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जब गुस्से में महेंद्र सिंह धोनी ने रैना को दी थी हिदायत, आरपी सिंह ने सुनाया ‘कैप्टन कूल’ के गुस्से का यह किस्सा…

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में ज्यादातर समय शांत चित्त होकर फैसले लेते हुए नजर आए...

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में ज्यादातर समय शांत चित्त होकर फैसले लेते हुए नजर आए, लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ जब ‘कैप्टन कूल’ ने तनावपूर्ण परिस्थितियों में मैदान पर आपा खो दिया। क्रिकेट के मैदान पर कुछ ऐसे मौके देखने को मिले हैं, जब धोनी साथी खिलाड़ियों या अंपायर पर गुस्सा होते हुए नजर आए हैं। टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाद आरपी सिंह ने बताया कि उन्होंने इस पूर्व कप्तान को कई बार गुस्सा होते हुए देखा है। क्रिकेटिंग सर्किल में धोनी और आरसीपी सिंह काफी करीबी दोस्त हैं और एक-दूसरे को अच्छे से जानते हैं। आरपी सिंह ने धोनी से जुड़े एक ऐसे ही किस्से के बारे में बताया है, जब ‘कैप्टन कूल’ सुरेश रैना पर गुस्सा हो गए थे।

आरपी सिंह ने क्रिकेट डॉट कॉम को दिए एक इंटरव्यू में बताया, ”हम श्रीलंका में थे। सुरेश रैना फील्डिंग के दौरान कवर पर बहुत आगे आ रहे थे और धोनी उन्हें चेतावनी दे रहे थे कि वह ज्यादा करीब न आएं। उन्होंने कहा, ”कुछ गेंदों के बाद सुरेश रैना ने एक गेंद मिस कर दी और महेंद्र सिंह धोनी ने थोड़ा सख्त लहजे में निर्देश देते हुए रैना को वापस जाने के लिए कहा। वह जब चाहते थे, तब सख्त और गुस्स हो सकते थे। हालांकि, वह कभी बोलने या चीखने वाले नहीं थे, लेकिन वह बहुत गुस्से में आ जाता था।”

महेंद्र सिंह धोनी के डेब्यू के नौ महीनों के बाद आरपी सिंह ने भारतीय क्रिकेट टीम में पदार्पण किया। अपने करियर की शुरुआत से लेकर आखिर तक वह धोनी की कप्तानी में ही खेले। धोनी के साथ अपनी पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए आरपी सिंह ने बताया कि वह दोनों एक डोमेस्टिक क्रिकेट मैच के दौरान मिले थे। उन्होंने बताया कि वह धोनी के बारे में पहले से ही जानते थे क्योंकि उन्होंने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी।

आरपी सिंह ने कहा, ”हम पहली बार डोमेस्टिक क्रिकेट में देवधर ट्रॉफी के दौरान मिले थे। वह तब से आए थे, जब वह पूर्वी क्षेत्र के लिए प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे। फिर, हम बेंगलुरु में एक कैंप के दौरान मिले। लेकिन मैं उन्हें पहले से जानता था, क्योंकि यूपी और बिहार में बहुत सारे अनौपचारिक टूर्नामेंट हुआ करते थे और जब हम पहली बार ग्वालियर में मिले थे तो वह पहले से ही एक बड़ा नाम थे।”

उन्होंने आगे कहा, ”वह काफी रिजर्व तरह के शख्स हैं और बहुत कम लोगों के साथ ही खुश रहते हैं। उन्हें हमेशा क्वारंटाइन टाइम पसंद रहा है। क्वारंटाइन ने शायद ही उन्हें प्रभावित किया हो, क्योंकि वह हमेशा अंदर ही रहे, अपनी अलग दुनिया में रहे, वीडियो गेम्स वगैरह खेलते रहे। वह हमेशा एक अंतर्मुखी रहे हैं। वह बहुत सारे दोस्त होने में विश्वास नहीं करते।”

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