Monday, February 23, 2026
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अरपा भैंसाझार परियोजना: तत्कालीन एसडीएम का कमाल… कलेक्टर को रखा धोखे में… अधिसूचित खसरा नंबर में छेड़छाड़… कलेक्टर को धोखे में रखकर किया करोड़ों रुपए का गबन…

बिलासपुर। अरपा भैंसाझार परियोजना में किए गए भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हुआ है। कोटा के तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप तिवारी ने तत्कालीन कलेक्टर डॉ. संजय अलंग को धोखे में रखकर अधिसूचित खसरा नंबर में छेड़छाड़ करते हुए दूसरे खसरा नंबर की जमीन का करोड़ों रुपए मुआवजा बांट दिया है। हद तो यह है कि जिस खसरा नंबर की जमीन का महज 2080 वर्गफीट डायवर्सन हुआ था, उस जमीन को 21500 वर्गफीट डायवर्टेट बताते हुए करोड़ों रुपए का मुआवजा दे दिया गया है। यही नहीं, धारा 19 के तहत प्रकाशित अधिसूचना में खसरा नंबर 19/4 की 54.75 डिसमिल जमीन नहर के लिए अधिग्रहित करने की सूचना दी गई थी, उस खसरे की 1.65 एकड़ जमीन का मुआवजा बांट दिया गया है।

अरपा भैंसाझार परियोजना की आड़ में कोटा के तत्कालीन एसडीएम व भू-अर्जन अधिकारी आनंदरूप तिवारी ने जमकर भ्रष्टाचार किया है। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार सकरी वितरक नहर के दायरे में कुल 46 खसरा नंबर की 19.95 एकड़ (8.076 हेक्टेयर) जमीन आ रही थी। धारा 11 के तहत अधिसूचना प्रकाशित करने के बाद तत्कालीन कलेक्टर डॉ. संजय अलंग से धारा 19 के तहत जमीन अधिग्रहित करने के लए तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप तिवारी ने प्रस्ताव भेजा। तत्कालीन कलेक्टर डॉ. अलंग ने 26 जून 2019 को इन खसरा नंबर की जमीन को अधिग्रहित करने के लिए धारा 19 के तहत अधिसूचना प्रकाशित करने की अनुमति दे दी। दो दैनिक समाचार पत्रों में इसी खसरा नंबर की जमीन को नहर के लिए अधिग्रहित करने के लिए अधिसूचना प्रकाशित की गई। अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद कोटा एसडीएम रहे आनंदरूप तिवारी ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर साजिश रची। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार धारा 19 के तहत प्रकाशित अधिसूचना में खसरा नंबर 1/3 स्थित 15.25 डिसमिल जमीन नहर के लिए ली जानी थी, लेकिन तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप तिवारी ने छेड़छाड़ करते हुए खसरा नंबर 1/3 की जगह खसरा नंबर 1/6 की जमीन बिठा दी, जबकि इस खसरा नंबर की जमीन नहर से करीब 200 मीटर दूर है और इस जमीन पर ऐश ब्रिक्स की फैक्ट्री लगी हुई है। वर्तमान में भी इस जमीन पर ऐश ब्रिक्स की फैक्ट्री मौजूद है। तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप तिवारी ने एक और खेल खेला। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार खसरा नंबर 1/6 स्थित 2180 वर्गफीट (5 डिसमिल) जमीन का डायवर्सन हुआ है, जबकि तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप तिवारी ने कुल 15 डिसमिल को डायवर्टेट बताया और मुआवजा 26 डिसमिल का दे दिया। वह भी 14 हजार रुपए वर्गफीट की दर से। इस तरह से अग्रवाल परिवार की जमीन कागजों में ली गई और उन्हें मुआवजा के रूप में करोड़ों रुपए दे दिए गए, जबकि खसरा नंबर 1/6 स्थित जमीन पर एक इंच नहर नहीं निकली है। इसी तरह धारा 19 के तहत प्रकाशित अधिसूचना में खसरा नंबर 19/4 स्थित 54 डिसमिल जमीन को नहर के दायरे में आना बताया गया है, यह जमीन शारदादेवी अग्रवाल पति पवन अग्रवाल के नाम पर दर्ज है।

तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप तिवारी ने खसरा नंबर 19/4 की 54 डिसमिल जमीन के बजाय 1.65 एकड़ जमीन का करोड़ों रुपए मुआवजा बांट दिया है, जबकि इस जमीन में भी एक इंच नहर नहीं निकली है। इस जमीन के सामने खसरा नंबर 39 में सरकारी जमीन है, जिस पर पूरी नहर निकाली गई है।

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