Saturday, August 30, 2025
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सूर्य ग्रहण 2022 : जानिए अपने इलाके में ग्रहण दिखने का समय और गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां…

साल का दूसरा सूर्य ग्रहण जारी है। यह खंड सूर्यग्रहण यानी आंशिक सूर्य ग्रहण भारत समेत दुनिया के कई इलाकों में देखने को मिलेगा। 25 अक्टूबर 202, दिन मंगलवार को सुबह 11.28 बजे से सूर्य ग्रहण शुरू होकर शाम 5.24 बजे तक चलेगा। ग्रहण का मध्यकाल साढ़े तीन बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक रहेगा। ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। लोग शुभ फल के लिए सिर्फ राम नाम का जप करते हैं। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए खास सावधानियां बरतने की बातें कही जाती हैं। कि जिससे कि गर्भ में पल रहे शिशु पर कोई नाकारात्मक प्रभाव न हो। आगे देखिए ग्रहण दिखने का समय और गर्भवती

महिलाओं के लिए सावधानियां-

गर्भवती महिलाएं ग्रहण में रखें ये सावधानियां –
– ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है।
– ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
– ग्रहणकाल में सहवास नहीं करना चाहिए।
– ग्रहणकाल में कैंसी, सूई, चाकू या धारदार चीजों का इस्तेमाल न करें।
– ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें।
– ग्रहण को खुली आंखों से न देखें। हालांकि सूर्यग्रहण देखने से आंखों पर कोई बुरा असर नहीं होता।
– ग्रहणकाल के दौरान गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।

 जानकारों के अनुसार, ग्रहण में सूतक का पालन तो करना ही चाहिए। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को भी विशेष सावधानी वर्तनी चाहिए। ग्रहण के दौरान ज्यादा से ज्यादा समय मंत्र जाप करें। ग्रहण के बाद स्नान दान करें। इससे ग्रहण का दुष्प्रभाव कम होगा। जानकारों के मुताबिक ग्रहण काल में गर्भ में पल रहे बच्चों को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिस विभिन्न उपाय अपनाने चाहिए। गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है। बाहर निकलना जरूरी हो तो गर्भ पर चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। इससे ग्रहण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर नहीं होगा।

ग्रहण के बाद क्या करें ?: ग्रहण काल के बाद लोगों को चाहिए कि स्नान कर खुद को पवित्र करें और मंदिर के देवी-देवताओं को भी स्नान कराएं। घर के मंदिर में बैठे देवताओं व घर पर गंगाजल छिड़कें। जो लोग ग्रहण के दौरान अन्न-जल नहीं लिया वे अब ग्रहण के बाद भोजन कर सकते हैं। ग्रहण का सूतक काल ग्रहण ग्रहण शुरू होने के 12 घंटे पहले और ग्रहण समाप्ति के 12 घंटे बात तक माना गया है। ऐसे में सूतक काल समाप्त होने के बाद ही मंदिरों में पूजा होगी। इसी को देखते हुए कल बुधवार को गोवर्धन पूजा होगी। आज शाम तक अमावस्या रहने के बाद कल प्रथमा तिथि रहेगी और इसके बाद गुरुवार को भाईदूज मनाया जा सकता है।

नंगी आंखों से न देखें सूर्यग्रहण: विशेषज्ञों के अनुसार, लोगों को सूर्य ग्रहण नंगी आंख से नहीं देखना चाहिए। इससे आपकी आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है। सूर्यग्रहण को देखने का सबसे सही तरीकों में से टेलीस्कोप, पिनहोल कैमरा, लाइव वीडियो का उपयोग कर सकते हैं। ग्रहण देखने में खासतौर से बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। सूर्य की तेज रोशनी से आंख की रेटिना पर बुरा प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है। धूप के चश्मे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। लोग रॉयल ऑब्जर्वेटरी ग्रीनविच द्वारा लाइव टेलीकास्ट पर ऑनलाइन सूर्य ग्रहण देख सकते हैं।

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