Tuesday, March 24, 2026
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अंधविश्वास के भंवर में फंसे लोग: जलती चिता के सामने तंत्र के जरिये कर रहे थे कैंसर का इलाज, महिला सहित तीन गिरफ्तार

छत्तीसगढ़, बिलासपुर। अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के चंगुल में फंसे लोग आज भी विज्ञान और चिकित्सा की सच्चाई को नकारकर ऐसे काम करने को मजबूर हैं, जो न केवल अवैज्ञानिक हैं, बल्कि खतरनाक भी साबित हो सकते हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में बिलासपुर के सिरगिट्टी इलाके में सामने आया, जहां एक कैंसर पीड़ित के इलाज के नाम पर जलती चिता के सामने तंत्र क्रिया की जा रही थी।

दरअसल यह घटना शनिवार की रात की है, जब सिरगिट्टी के मरघट में एक महिला, उसके भतीजे और एक अन्य व्यक्ति को जलती चिता के सामने तंत्र-मंत्र करते हुए देखा गया। मोहल्ले वालों ने इस घटना को लेकर संदेह जताया और तुरंत हस्तक्षेप किया। इस प्रक्रिया में, महिला और उसके साथियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस की पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि महिला, अन्नपूर्णा जाटवर, जो उज्जैन की निवासी है, को शंकर यादव नामक व्यक्ति ने बुलाया था, जिनका भांजा कैंसर से पीड़ित है।

तंत्र-मंत्र के नाम पर अंधविश्वास

शंकर यादव ने अपने भांजे के इलाज के लिए अन्नपूर्णा जाटवर से संपर्क किया था, जिन्होंने तंत्र क्रिया के माध्यम से इलाज का आश्वासन दिया था। इसके लिए, अन्नपूर्णा जाटवर अपने भतीजे कुलदीप के साथ बिलासपुर आई और मरघट में चिता की आग लेकर तंत्र क्रिया शुरू की। मोहल्ले वालों ने इस क्रिया का विरोध किया और इसे किसी अनिष्ट की आशंका के तहत देखा। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और तीनों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की।

 पुलिस का हस्तक्षेप और कार्रवाई

सिरगिट्टी थाना प्रभारी विजय चौधरी ने बताया कि महिला, उसके भतीजे और शंकर यादव के खिलाफ पुलिस ने जुर्म दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस घटना को लेकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की है। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि तंत्र क्रिया का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था, और यह पूरी तरह से अंधविश्वास पर आधारित था।

समाज में अंधविश्वास की जड़ें

यह घटना समाज में अंधविश्वास की गहरी जड़ों को उजागर करती है। तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों के पीछे लोग अपने रोगों के इलाज की उम्मीद लगाते हैं, लेकिन यह केवल उनकी समस्याओं को और बढ़ा सकता है।

इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि समाज में आज भी अंधविश्वास का बोलबाला है, और इसे समाप्त करने के लिए जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। लोगों को यह समझना चाहिए कि चिकित्सा विज्ञान ही उनकी समस्याओं का वास्तविक समाधान है, न कि तंत्र-मंत्र जैसी अवैज्ञानिक गतिविधियां। पुलिस की कार्रवाई ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है, लेकिन इसके बावजूद, समाज में ऐसे अंधविश्वासों के खिलाफ लड़ाई जारी रखनी होगी।

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