Saturday, March 28, 2026
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डीएड/डीएलएड के सैकड़ों अभ्यर्थियों ने निकाली न्याय यात्रा: नियुक्ति के अधिकार की लड़ाई, मुख्यमंत्री के नाम सौपा ज्ञापन…

बिलासपुर। डीएड और डीएलएड अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन हेतु अपनी मांगों को लेकर न्याय यात्रा निकाली, जिसमें बड़ी संख्या में बेरोजगार अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और अपनी नियुक्ति की मांग की।

छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 का विज्ञापन 4 मई 2023 को जारी किया गया था। इसके तहत डीएड और बीएड धारकों के बीच पात्रता को लेकर विवाद शुरू हुआ। डीएड अभ्यर्थियों ने विज्ञापन के 30 दिनों के भीतर परीक्षा पूर्व ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका (WPS 3541/2023) दायर कर दी थी, जिसमें बीएड धारकों की पात्रता को चुनौती दी गई थी।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2023 में डीएड बनाम बीएड विवाद का फैसला सुरक्षित कर लिया था। 11 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने बीएड डिग्री धारकों को सहायक शिक्षक पद के लिए असंवैधानिक ठहराते हुए फैसला सुनाया। इस फैसले के अनुसार, सहायक शिक्षक पद पर केवल डीएड अभ्यर्थियों को ही पात्र माना गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2023 को आदेश पारित किया, जिसमें केवल डीएड धारकों को काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति दी गई। बीएड धारकों ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीएड धारकों की काउंसलिंग और नियुक्ति को हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रखा।

अंततः 2 अप्रैल 2024 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने अंतिम फैसले में केवल डीएड धारकों की नियुक्ति का आदेश दिया, जिसे 6 सप्ताह के भीतर लागू करने का निर्देश दिया गया था। बीएड धारकों और राज्य सरकार द्वारा इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन 28 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया और डीएड के पक्ष में अंतिम फैसला दिया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, 1 महीने बाद भी डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं हो सकी। नियुक्ति प्रक्रिया में देरी और सरकारी विभाग की निष्क्रियता के कारण डीएड अभ्यर्थी मानसिक तनाव का शिकार हो गए हैं। न्याय की मांग करते हुए, अभ्यर्थियों ने न्याय यात्रा का आयोजन किया, जिसमें वे अपनी नियुक्ति के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं।

सरकार और विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण, अभ्यर्थी न्याय पाने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। न्याय यात्रा के माध्यम से उन्होंने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करने और जल्द से जल्द उनकी नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

इस न्याय यात्रा ने न केवल अभ्यर्थियों की व्यथा को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि जब न्यायालय के फैसलों को लागू करने में देरी होती है, तो बेरोजगारी की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में कितनी जल्द कार्रवाई करती है और डीएड अभ्यर्थियों को उनका हक दिलाती है।

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