Friday, March 27, 2026
Homeछत्तीसगढ़डीएड/डीएलएड अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना: न्यायालय के आदेश के बावजूद नियुक्ति में...

डीएड/डीएलएड अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना: न्यायालय के आदेश के बावजूद नियुक्ति में देरी, एक महिला अभ्यर्थी की तबियत बिगड़ अस्पताल में भर्ती…

छत्तीसगढ़ के हजारों डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) और डीएलएड (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से नया रायपुर के तूता धरनास्थल पर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई है, और वे पिछले एक साल से काउंसलिंग के बाद भी नियुक्ति के इंतजार में भटक रहे हैं।

इस मुद्दे का प्रारंभ 2 अप्रैल 2024 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक फैसले से हुआ था, जिसमें कोर्ट ने 6 सप्ताह के भीतर डीएड/डिप्लोमा अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। हालांकि, सरकार और संबंधित विभाग ने इस आदेश को लागू नहीं किया। इसके विपरीत, सरकार और बीएड अभ्यर्थियों ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी 28 अगस्त 2024 को सरकार को आदेश दिया कि डीएड/डिप्लोमा अभ्यर्थियों की नियुक्ति जल्द की जाए। बावजूद इसके, अब तक इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल पाई है, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है।

धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों को न केवल नियुक्ति की देरी से जूझना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें वहां बुनियादी सुविधाओं की भी कमी का सामना करना पड़ रहा है। धरनास्थल पर मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे आज एक महिला अभ्यर्थी की तबियत बिगड़ गई और उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इसके अलावा, दैनिक क्रियाओं के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि उन्हें शीघ्र नियुक्ति दी जाए और धरना स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं कर सकती, तो सुशासन और संविधान का पालन करने की गारंटी कैसे दी जा सकती है। अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ और केंद्र सरकार दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि नियुक्ति में देरी संविधान और न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है।

हाल ही में, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने शिक्षक की कमी को लेकर पीआईएल की सुनवाई के दौरान बीएड और डीएड विवाद का जिक्र किया और सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस ने सरकार को स्पष्ट रूप से कहा कि डीएड अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति दी जानी चाहिए ताकि प्रदेश में शिक्षक की कमी को पूरा किया जा सके। इस आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि डीएड अभ्यर्थियों को जल्द ही राहत मिलेगी।

डीएड और डीएलएड अभ्यर्थियों का संघर्ष न केवल उनकी नौकरी पाने की लड़ाई है, बल्कि यह न्यायालय के आदेशों के पालन की भी लड़ाई है। जिस प्रकार न्यायालय ने सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू करने के लिए आदेश दिया है, उससे अभ्यर्थियों को कुछ आशा की किरण दिखाई दे रही है। अब सरकार पर यह जिम्मेदारी है कि वह न्यायालय के आदेशों का पालन करे और हजारों योग्य अभ्यर्थियों को उनका हक दिलाए, ताकि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भी सशक्त किया जा सके।

spot_img

advertisement

spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts

error: Content is protected !!
Latest
Verified by MonsterInsights