Friday, April 4, 2025
Homeशिक्षाबिलासपुर: गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने रचा इतिहास, वर्ल्ड ग्रीन मेट्रिक रैंकिंग में...

बिलासपुर: गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने रचा इतिहास, वर्ल्ड ग्रीन मेट्रिक रैंकिंग में 346वें स्थान पर, आलोक कुमार बोले निरंतर प्रयासों का फल…

बिलासपुर, 13 दिसम्बर 2024

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय ने यू.आई. ग्रीन मेट्रिक वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2024 में 346वां स्थान प्राप्त किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 59 स्थान बेहतर है। इस उपलब्धि के साथ ही विश्वविद्यालय ने भारत में 12वां स्थान प्राप्त किया है। यह रैंकिंग विश्वविद्यालय के हरित प्रयासों और पर्यावरणीय जागरूकता की दिशा में किए गए महत्वपूर्ण कार्यों का प्रमाण है

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की इस सफलता का श्रेय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल और उनके नेतृत्व में किए गए सतत प्रयासों को जाता है। वर्ष 2021 में कुलपति का पदभार संभालने के बाद से ही प्रो. चक्रवाल ने विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने के लिए कई नवाचार और परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं। इनके प्रयासों के चलते विश्वविद्यालय ने न केवल नैक से ए++ ग्रेड हासिल किया, बल्कि अन्य प्रतिष्ठित रैंकिंग जैसे क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग, टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से कैटेगरी वन की स्वायत्ता भी प्राप्त की।

चार साल में बड़ा सुधार
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने पहली बार 2021 में ग्रीन मेट्रिक वर्ल्ड रैंकिंग में हिस्सा लिया था, तब उसका विश्व रैंक 673 और भारत में 28वां स्थान था। इसके बाद से हर साल विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 2022 में 503वां और 2023 में 405वां स्थान प्राप्त करने के बाद, 2024 में 346वें पायदान तक पहुंचना विश्वविद्यालय के सतत विकास और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का प्रमाण है।

पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता
विश्वविद्यालय ने हरित परिसर के निर्माण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वृक्षारोपण के तहत लगभग 30,000 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें विलुप्त हो रही प्रजातियों को संरक्षित करने का विशेष ध्यान रखा गया है। परिसर में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के लिए दो मेगावाट रूफटॉप सोलर एनर्जी प्लांट की स्थापना की गई है, और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बायोगैस प्लांट, वर्मी कंपोस्ट और जैविक खाद निर्माण जैसे उपाय किए गए हैं। जल संरक्षण के लिए भी विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें चार तालाबों का जीर्णोद्धार और सभी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का उपयोग शामिल है।

कार्बन फुटप्रिंट में कमी
परिसर में कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए ई-रिक्शा की सुविधा प्रदान की गई है। भविष्य में, विश्वविद्यालय कार्बन ट्रेडिंग के क्षेत्र में भी काम करने की योजना बना रहा है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक उन्नति भी संभव हो सके। विश्वविद्यालय ने अपने छात्रों और कर्मचारियों के बीच पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

रैंकिंग के मानदंड
यू.आई. ग्रीन मेट्रिक वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन अधोसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा प्रबंधन, ग्रीन ट्रांसपोर्ट, अपशिष्ट प्रबंधन, जल संसाधन प्रबंधन, शिक्षा और अनुसंधान जैसे मानकों के आधार पर किया जाता है। इस वर्ष रैंकिंग में 95 देशों के 1477 विश्वविद्यालयों ने हिस्सा लिया, जिसमें गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने 346वां स्थान प्राप्त किया है।

उपलब्धि का महत्व
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय का यह प्रदर्शन न केवल इसके पर्यावरणीय जागरूकता और शोध के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह विश्वविद्यालय के समग्र विकास की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों का भी प्रमाण है। इस प्रकार की उपलब्धियां न केवल विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को बढ़ाती हैं, बल्कि छात्रों के लिए एक हरित और स्थायी भविष्य की दिशा में प्रेरणादायक भी हैं।

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत है कि किस प्रकार पर्यावरण संरक्षण और शैक्षिक उन्नति को समानांतर रूप से साधा जा सकता है।

spot_img
spot_img
spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts

error: Content is protected !!