Thursday, March 19, 2026
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बिलासपुर मलीय कीचड़ उपचार संयंत्र की स्थापना: अब सेप्टिक टैंक की सफाई होगी आसान और व्यवस्थित…

बिलासपुर, 09 मई 2025 – स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। विकासखंड मस्तूरी की ग्राम पंचायत परसदा वेद में मलीय कीचड़ उपचार संयंत्र (Fecal Sludge Treatment Plant – FSTP) की स्थापना की गई है। यह संयंत्र 171 गांवों एवं नगरीय निकाय क्षेत्रों को सेवा प्रदान करेगा, जहाँ सेप्टिक टैंकों की नियमित सफाई एवं कीचड़ प्रबंधन का लक्ष्य तय किया गया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बनाए गए सेप्टिक टैंक वाले शौचालयों से निकलने वाले मलीय कीचड़ को वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से निष्पादित करना है। संयंत्र के संचालन के लिए ग्राम पंचायत द्वारा न्यूनतम दरों पर डिस्लज वाहन की व्यवस्था की गई है, जो घरों या संस्थानों से मलीय कीचड़ एकत्र कर संयंत्र में लाता है।

सेवा प्राप्त करने की प्रक्रिया:

यदि किसी हितग्राही के घर या संस्थान का सेप्टिक टैंक भर गया हो, तो वह ग्राम पंचायत परसदा वेद के सरपंच (मोबाइल: 9893306537) या सचिव (मोबाइल: 9202698717) से संपर्क कर सफाई की सुविधा प्राप्त कर सकता है।

दर निर्धारण:

सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए दूरी और उपयोगकर्ता के प्रकार के अनुसार अलग-अलग दर निर्धारित की गई है:

5 किलोमीटर तक की दूरी पर:

  • घर: ₹1500
  • निजी कंपनी/दुकान/व्यवसाय: ₹2500
  • स्कूल/सामुदायिक शौचालय: ₹1000

5 से 25 किलोमीटर की दूरी पर:

  • घर: ₹2500
  • निजी कंपनी/दुकान/व्यवसाय: ₹3000
  • स्कूल/सामुदायिक शौचालय: ₹1500

25 किलोमीटर से अधिक दूरी पर:

  • ₹50 प्रति किलोमीटर अतिरिक्त शुल्क के साथ
  • घर: ₹2500 + दूरी अनुसार शुल्क
  • निजी कंपनी/दुकान/व्यवसाय: ₹3000 + दूरी अनुसार शुल्क
  • स्कूल/सामुदायिक शौचालय: ₹1500 + दूरी अनुसार शुल्क

महत्वपूर्ण पहलू:

  • यह संयंत्र पर्यावरण की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मल-अपशिष्ट का सुरक्षित निष्पादन सुनिश्चित करता है।
  • संयंत्र से प्राप्त उपचारित कीचड़ का उपयोग जैविक खाद या अन्य रूपों में किया जा सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी लाभ हो सकता है।
  • यह प्रणाली न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देती है बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन का साधन भी बनती है।

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