बिलासपुर। गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र अर्सलान अंसारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। छात्र का शव 23 अक्टूबर 2025 को विश्वविद्यालय परिसर स्थित सरस्वती मंदिर रोड के पास बांधा तालाब में तैरता हुआ मिला था। घटना की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर विस्तृत जांच शुरू की थी।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर की गई मर्ग जांच में घटनास्थल निरीक्षण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के कथन तथा अन्य परीक्षणों में यह स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्र सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही बरती गई थी। जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि बांधा तालाब क्षेत्र फिसलन भरा और गहरा होने के बावजूद इसे वर्जित क्षेत्र घोषित करने, सुरक्षा पटल लगाने, चेतावनी बोर्ड लगाने तथा सुरक्षा बाड़ा लगाने जैसी अनिवार्य व्यवस्थाएँ नहीं की गई थीं।
सुरक्षा उपायों की अनदेखी और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर उपेक्षा एवं लापरवाही बरतने की वजह से ही छात्र की मृत्यु होना पाया गया।
इन सभी तथ्यों के आधार पर थाना कोनी पुलिस ने सुरक्षा अधिकारी, वार्डन एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 559/25 कायम करते हुए धारा 106(1), 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण को विवेचना में लिया है।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि घटना वाले दिन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या थी, जिम्मेदार अधिकारियों ने नियमों का पालन क्यों नहीं किया, और क्या यह लापरवाही मौत का प्रत्यक्ष कारण बनी।
इस मामले ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठनों और अभिभावकों ने भी इस घटना को लेकर रोष व्यक्त किया है और विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की है।
मृतक अर्सलान अंसारी, निवासी कादिरपुर (बिहार), विश्वविद्यालय में अध्ययनरत थे। उनके परिजनों ने भी न्यायिक कार्रवाई और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


