बिलासपुर, 4 नवंबर को बिलासपुर रेलवे स्टेशन के पास हुई मेमू लोकल और खड़ी मालगाड़ी की भिड़ंत में सामने आया जिम्मेदारी का बड़ा सवाल अब और गंभीर हो गया है। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) द्वारा जारी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह दुर्घटना किसी तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि रेलवे सिस्टम और अधिकारियों की लापरवाही से हुई थी। रिपोर्ट में कई ऐसी चूकें दर्ज की गई हैं जो सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करती हैं।
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि मेमू ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट को सिंगल मैन वर्किंग की अनुमति दी गई थी, जबकि वह सायको टेस्ट में अनुत्तीर्ण था। रेलवे बोर्ड के 15 अक्टूबर 2024 के आदेश के अनुसार, मनोवैज्ञानिक परीक्षण पास किए बिना किसी लोको पायलट को मेमू चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने अपने स्तर पर अलग नियम लागू कर इस आदेश को दरकिनार कर दिया।
CRS ने इस निर्णय को गंभीर त्रुटि बताते हुए नियमों का सीधा उल्लंघन माना है। जोन ने सफाई में कहा कि फेल लोको पायलट के साथ सहायक लोको पायलट की तैनाती पर्याप्त थी, लेकिन जांच टीम ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया।
कोलकाता के मुख्य संरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्रा ने घटना के अगले ही दिन अपनी टीम के साथ बिलासपुर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और मेमू ट्रेन में ट्रायल रन भी किया। जांच टीम ने 91 से अधिक रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की तथा बड़े पैमाने पर दस्तावेज तलब किए।
दस्तावेजों की समीक्षा और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया कि दुर्घटना का मूल कारण ट्रेन संचालन में की गई त्रुटि है।
CRS द्वारा चिन्हित प्रमुख अनियमितताएँ:
- लोको पायलट का सक्षमता प्रमाणपत्र अधूरा और त्रुटिपूर्ण
- ACTM (AC Traction Manual) के निर्धारित प्रारूप का पालन नहीं
- प्रमाणपत्र में यह उल्लेख नहीं कि लोको पायलट किस सेक्शन में काम करने योग्य था
- किस प्रकार के इंजन के लिए प्रमाणित किया गया, इसका विवरण भी अनुपस्थित
- महत्वपूर्ण रजिस्टर और रिकॉर्ड अधूरे
- ACTM-31216 और ACTM-31217 के अनुसार न तो रजिस्टर संधारित किए गए
- न ही सर्विस रिकॉर्ड में आवश्यक प्रविष्टियाँ की गईं
- 22 नवंबर 2024 के CLC ग्रेडिंग मूल्यांकन में भी कई कमियाँ
- लोको पायलट की सुरक्षा पुस्तिकाओं और संशोधित स्लिप्स की जानकारी संतोषजनक नहीं पाई गई
- मानक संचालन प्रक्रियाओं का सही अनुपालन नहीं मिला
हादसे में 12 की मौत, 20 से अधिक घायल
4 नवंबर की शाम लालखदान के पास गेवरारोड–बिलासपुर रेलखंड पर मेमू ट्रेन खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि लोको पायलट सहित 12 लोगों की मौके पर मौत हो गई और 20 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे।
रेल प्रशासन ने कहा – अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
बिलासपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम अनुराग कुमार सिंह ने कहा:
“यह सिर्फ प्रारंभिक रिपोर्ट है। रेलवे को इस पर अपना जवाब देना है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक जिम्मेदारियां तय होंगी। अभी किसी भी टिप्पणी का कोई औचित्य नहीं है।”
उन्होंने यह भी बताया कि हाई-लेवल जांच गोपनीय रखी जाती है और फाइनल रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
अब बड़े कदमों की जरूरत
प्रारंभिक रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह दुर्घटना केवल मानवीय त्रुटि नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का नतीजा थी।
- योग्यता की जांच में लापरवाही
- रिकॉर्ड में अनियमितताएँ
- सुरक्षा नियमों की अनदेखी
ये सभी मिलकर उस खतरनाक स्थिति को जन्म देते हैं, जिसकी कीमत 12 लोगों ने अपनी जान देकर चुकाई।
अब रेलवे प्रशासन पर यह जिम्मेदारी है कि अंतिम रिपोर्ट आने पर कठोर कार्रवाई करे और उन व्यवस्थागत कमियों को ठीक करे, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।


