Tuesday, January 6, 2026
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ज़िला भाजपा अध्यक्ष के बयान से मिलीभगत उजागर, चुनाव आयोग की बातों को झुठलाने पर उतरी भाजपा: विजय केशरवानी…

बिलासपुर।
मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में सामने आई गंभीर गड़बड़ियों के बाद सियासत तेज हो गई है। ज़िला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी ने ज़िला भाजपा अध्यक्ष के बयान पर कड़ा हमला बोलते हुए इसे भाजपा और निर्वाचन तंत्र की मिलीभगत का प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि वोट चोरी की कोशिश उजागर होने के बाद भाजपा नेता कुंठित होकर अब निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे हैं।

विजय केशरवानी ने स्पष्ट किया कि जब स्वयं निर्वाचन कार्यालय ने अपनी त्रुटि स्वीकार करते हुए आधिकारिक बयान जारी कर दिया है कि नर्मदा नगर निवासी विजय केशरवानी का नाम बिलासपुर विधानसभा की मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा, तो फिर भाजपा किस आधार पर एपिक नंबर को लेकर भ्रम फैला रही है, यह समझ से परे है।

उन्होंने कहा कि यदि भिलाई के वार्ड क्रमांक 54 की मतदाता सूची में उनके नाम की मैपिंग के दौरान एपिक नंबर गलत दर्ज हुआ है, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी ज़िला निर्वाचन अधिकारी और संबंधित बीएलओ की है। सवाल यह है कि उनका नाम भिलाई की मतदाता सूची में कैसे और किसके निर्देश पर जोड़ा गया, और किसी अन्य व्यक्ति का एपिक नंबर उनके नाम से कैसे अपलोड कर दिया गया?

पूर्व ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। “नाम किसी का और एपिक नंबर किसी और का—यह साफ तौर पर दर्शाता है कि मतदाता सूची में हेरफेर किया जा रहा है। मतदाता का नाम जहां चाहे डिलीट कर दो और जहां मन करे वहां जोड़ दो, एपिक नंबर भी मनमाने तरीके से बदल दो—यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है,” उन्होंने कहा।

विजय केशरवानी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ज़िला भाजपा अध्यक्ष इस बात से इंकार कर सकते हैं कि उनका नाम SIR के तहत भिलाई की मतदाता सूची में मैप किया गया था? उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष को बयान देने से पहले पूरे तथ्य समझने चाहिए थे, न कि निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता बनकर आधे-अधूरे तर्क देने चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि मतदाता सूची में किसी भी मतदाता की मैपिंग एक ही स्थान पर हो सकती है। यदि किसी मतदाता का नाम किसी अन्य ज़िले या प्रदेश की मतदाता सूची में मैप कर दिया गया है, तो उसे उसके वास्तविक निवास स्थान की मतदाता सूची में तब तक जोड़ा नहीं जा सकता, जब तक पहले से की गई मैपिंग को निरस्त न किया जाए। इस नियम के तहत, उनका नाम भी तभी बिलासपुर की मतदाता सूची में जोड़ा जा सकता है, जब भिलाई से की गई गलत मैपिंग को औपचारिक रूप से रद्द किया जाए।

विजय केशरवानी ने यह भी याद दिलाया कि उनका नाम वर्ष 2003 और 2004 की मतदाता सूची में बिलासपुर में दर्ज रहा है। वे वर्ष 2003 में बेलतरा विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं और ज़िला कांग्रेस कमेटी, ज़िला युवक कांग्रेस, ज़िला एनएसयूआई के अध्यक्ष, पार्षद तथा मेयर-इन-काउंसिल (MIC) के सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बेलतरा विधानसभा से चुनाव लड़ना कोई गुनाह है, जिसके चलते कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भाजपा की “डबल इंजन सरकार” होने के कारण चुनावी तंत्र पर दबाव बनाकर इस तरह की गड़बड़ियां की जा रही हैं।

विजय केशरवानी ने दो टूक कहा कि वे इस मामले को छोड़ने वाले नहीं हैं और मतदाता सूची की शुचिता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अंतिम स्तर तक लड़ाई लड़ेंगे।

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