नई दिल्ली, 14 दिसम्बर 2025। भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और दीर्घकालिक स्थिरता के लक्ष्यों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत डीवी कपूर फाउंडेशन द्वारा पहले ‘डीवी कपूर फाउंडेशन एनर्जी इनोवेशन अवॉर्ड्स’ का आयोजन किया गया। यह भव्य समारोह 12 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित स्कोप कॉम्प्लेक्स में आयोजित हुआ, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र में उत्कृष्ट तकनीकी नवाचारों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं डीवी कपूर फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. सुरेश प्रभु, पद्म विभूषण डॉ. अनिल काकोडकर (पूर्व चेयरमैन, एटॉमिक एनर्जी कमिशन एवं ग्रैंड जूरी चेयरमैन), डीवी कपूर फाउंडेशन के संस्थापक एवं एनटीपीसी लिमिटेड के फाउंडर चेयरमैन डॉ. डी.वी. कपूर, पूर्व सचिव (विद्युत मंत्रालय) एवं ट्रस्टी सदस्य श्री आर.वी. शाही, पूर्व महानिदेशक इंटरनेशनल सोलर अलायंस डॉ. अजय माथुर, आईआईटी दिल्ली के निदेशक डॉ. रंगन बनर्जी सहित एनटीपीसी तथा ऊर्जा क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
यह पुरस्कार दो श्रेणियों में प्रदान किए गए। कैटेगरी-1 में 38 वर्ष से कम आयु के युवा इनोवेटर्स को उनके उत्कृष्ट शोध एवं नवाचार के लिए सम्मानित किया गया, जबकि कैटेगरी-2 में व्यक्तियों एवं संगठनों को ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए।
कैटेगरी-1 के अंतर्गत सीएसआईआर-एनआईआईएसटी के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. अचु चंद्रन को ‘नैनो इलेक्ट्रिसिटी जनरेटर’ के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण अनुसंधान के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति पत्र, ट्रॉफी एवं एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। यह नवाचार भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कैटेगरी-2 में एनटीपीसी की अनुसंधान एवं विकास इकाई ‘नेत्रा’ को ‘ग्रीन यूज ऑफ कोल टेक्नोलॉजीज’ के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान एवं तकनीकी विकास के लिए पुरस्कार मिला। एनटीपीसी-नेत्रा की ओर से कार्यकारी निदेशक (नेत्रा) श्री शश्वतम ने अपनी टीम के साथ यह पुरस्कार प्राप्त किया। इस श्रेणी में विजेता को प्रशस्ति पत्र, ट्रॉफी एवं 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया।
अपने संबोधन में प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी को सेवाएं प्रदान करती है और देश 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने विकास और ऊर्जा उपयोग के बीच प्रत्यक्ष संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी देश का मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) उसकी ऊर्जा खपत से गहराई से जुड़ा होता है। भारत का औसत एचडीआई वर्तमान में 0.67 है, जबकि विकसित देशों में यह लगभग 0.9 है। उन्होंने बताया कि भारत में प्रति व्यक्ति वार्षिक ऊर्जा खपत लगभग 21 गीगाजूल है, जबकि विकसित देशों के स्तर तक पहुंचने के लिए इसे लगभग 56 गीगाजूल तक ले जाना होगा। इसके लिए अनुसंधान, नवाचार और नीतिगत समर्थन के ठोस प्रयास आवश्यक हैं।
प्रोफेसर सूद ने यह भी उल्लेख किया कि भारत सरकार द्वारा नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की शुरुआत से देश में डीप-टेक रिसर्च को नई गति मिली है, जिससे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में मदद मिलेगी।
डॉ. सुरेश प्रभु ने ऊर्जा क्षेत्र में बदलते नवाचार प्रतिमानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तकनीकी समाधान और स्वदेशी अनुसंधान अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने एनटीपीसी में संस्थापक चेयरमैन के रूप में डॉ. डी.वी. कपूर के योगदान को स्मरण करते हुए डीवी कपूर फाउंडेशन द्वारा इस तरह के पुरस्कारों की शुरुआत को समय की मांग बताया।
ग्रैंड जूरी के चेयरमैन डॉ. अनिल काकोडकर ने पुरस्कार चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और सख्ती पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और लीडर्स की जिम्मेदारी है कि वे युवा इनोवेटर्स को मार्गदर्शन और सहयोग दें, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम में मौजूद ऊर्जा विशेषज्ञों और गणमान्य अतिथियों ने डीवी कपूर फाउंडेशन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के मंच नवाचार को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ भारत के स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य को मजबूती प्रदान करते हैं।
डीवी कपूर फाउंडेशन ने दोहराया कि वह ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान, विकास और स्वदेशी तकनीकी समाधानों को निरंतर सहयोग देता रहेगा, ताकि भारत का स्वच्छ ऊर्जा रूपांतरण और अधिक सशक्त हो सके।


