रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर पिछले एक महीने से हड़ताल कर रहीं मध्यान्ह भोजन रसोइयों में से दो महिलाओं की मौत के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस बीच राज्य सरकार ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए मौत को धरना स्थल से जोड़ने को भ्रामक बताया है।
राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि जिन दो महिला रसोइयों की मृत्यु की खबर सामने आई है, उनकी मौत धरना स्थल पर नहीं हुई है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के हवाले से जारी जानकारी में कहा गया है कि दोनों महिलाएं दो दिन पहले ही धरना स्थल से अपने-अपने घर लौट चुकी थीं और बाद में इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मृत्यु हुई।
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, धरना स्थल पर तबीयत बिगड़ने से मौके पर ही दो रसोइयों की मौत होने की खबर तथ्यहीन है। विभाग का कहना है कि दोनों ही मामलों में मृत्यु का प्रत्यक्ष संबंध न तो धरना स्थल से है और न ही हड़ताल से।
सरकारी बयान के मुताबिक, मृतकों में एक महिला रसोईया बालोद जिले की निवासी थी, जो 20 और 21 जनवरी को धरना स्थल पर मौजूद रही थी, लेकिन इसके बाद अपने निवास स्थान लौट गई थी। वहां उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे दल्ली राजहरा के शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
वहीं दूसरी महिला रसोईया बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड की रहने वाली थी, जो पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। उसे भिलाई स्थित शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
हालांकि लोक शिक्षण संचालनालय इस सवाल पर स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाया है कि एक महीने से जारी आंदोलन के दौरान दोनों महिलाएं किन परिस्थितियों में धरना स्थल छोड़कर घर लौटी थीं। हड़ताल पर बैठी रसोइयों का आरोप है कि दोनों की तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें घर भेजा गया था और सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है।
इस बीच लोक शिक्षण संचालनालय ने यह भी बताया कि हड़ताल पर बैठे रसोइयों के प्रतिनिधियों के साथ संचालक लोक शिक्षण संचालनालय एवं स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव स्तर पर चर्चा हुई थी। बैठक में शासन की ओर से रसोइयों के मानदेय में 25 प्रतिशत यानी 500 रुपये की वृद्धि की जानकारी दी गई थी और हड़ताल समाप्त कर अपने-अपने घर लौटने का आग्रह किया गया था। इसके बावजूद कुछ रसोइयों ने धरना स्थल पर बने रहने का निर्णय लिया।
सरकार का कहना है कि वह रसोइयों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को लेकर सतर्क है। शासन द्वारा रसोइयों के हित में आवश्यक निर्णय और कार्यवाहियां लगातार की जा रही हैं।
हालांकि दो रसोइयों की मौत के बाद आंदोलनकारी रसोइयों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति और गहराती नजर आ रही है। एक ओर सरकार धरना और मौत के बीच प्रत्यक्ष संबंध से इनकार कर रही है, वहीं आंदोलनरत रसोइयों का कहना है कि लंबे समय से चल रहा आंदोलन, आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य उपेक्षा इन मौतों के पीछे अहम कारण हैं।


