बिलासपुर, 23 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर के तत्कालीन कुलसचिव शैलेन्द्र दुबे को गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार विश्वविद्यालय मद में आबंटित राशि के उपयोग, जेम पोर्टल के माध्यम से सामग्री क्रय में आर्थिक गड़बड़ी तथा छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 (संशोधित 2025) के प्रावधानों की अवहेलना प्रथम दृष्टया पाई गई है।
आदेश में उल्लेख है कि उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के नियम 3 के विपरीत है। शासन ने उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम के नियम 9 (1) (क) के तहत निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय, उच्च शिक्षा विभाग, बिलासपुर संभाग निर्धारित किया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा तथा विभागीय जांच पृथक से संचालित की जाएगी।
इस पूरे मामले में छात्रों की ओर से भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। उनका कहना था कि प्रभारी कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र दुबे और कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेई की कथित मिलीभगत से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक, शैक्षणिक और वित्तीय कार्यों में अनियमितताएं हो रही हैं।
विवाद का एक प्रमुख मुद्दा कुलपति के निज सहायक उपेन चंद्राकर की नियुक्ति को लेकर भी रहा। छात्रों का आरोप है कि वर्ष 2024 में हुई उनकी नियुक्ति में प्रस्तुत प्रमाण पत्र राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा परिषद से अनुमोदित नहीं था। साथ ही यह भी दावा किया गया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा संबंधित प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित किया जा चुका है।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप है कि एक ही स्वामित्व से जुड़े अलग-अलग फर्मों के माध्यम से जेम पोर्टल पर करोड़ों रुपये की खरीदी की गई। आरोपों के अनुसार 15 अप्रैल 2025 को बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए L1 पद्धति से एक करोड़ रुपये से अधिक की सामग्री क्रय की गई और एक ही दिन में तीन फर्मों—सागर इंडस्ट्रीज (जांजगीर), सिंघानिया ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज (जांजगीर) तथा ओशन एंटरप्राइज (जांजगीर)—को 26 क्रय आदेश जारी किए गए।
आरोप है कि सभी सामग्रियों की L1 दर इन्हीं फर्मों की आई, जबकि इनके एक ही परिवार से जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है। इसी प्रकार 19 अप्रैल 2025 को 6 और 28 अप्रैल 2025 को भी कुछ कार्यादेश इन्हीं फर्मों को जारी किए गए।
इन तथ्यों को लेकर शासन स्तर पर गंभीरता दिखाई गई है। जेम खरीदी में गड़बड़ी के मामलों को लेकर राज्य सरकार पहले से ही सख्त रुख अपना रही है। मुख्य सचिव विकास शील ने भी जेम पोर्टल के माध्यम से होने वाली खरीदी में अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में पूर्व में महासमुंद जिले के राजीम स्थित राजीव लोचन पीजी कॉलेज की प्राचार्या सहित चार सहायक प्राध्यापकों को भी निलंबित किया जा चुका है।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रारंभ की गई विभागीय जांच में यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर और भी कठोर कार्रवाई संभव है। विश्वविद्यालय की वित्तीय प्रक्रियाओं और जेम पोर्टल पर हुई खरीदी की विस्तृत पड़ताल से आने वाले दिनों में और अहम खुलासे हो सकते हैं।
फिलहाल, इस कार्रवाई को शासन द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।



