Saturday, February 28, 2026
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बिलासपुर: आदतन बदमाश मैडी समेत 13 दोषी, अदालत ने सुनाई 7 साल सश्रम कारावास की सजा…

बिलासपुर के हैवेंस पार्क होटल के सामने हुई बहुचर्चित मारपीट और जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। आदतन बदमाश रितेश निखारे उर्फ मैडी को 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। उसके साथ कुल 12 अन्य आरोपियों को भी दोषी ठहराते हुए दंडित किया गया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) लवकेश प्रताप सिंह की अदालत ने सुनाया।

अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (जान से मारने की कोशिश), 147 (बलवा) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में अपराध सिद्ध पाया। न्यायालय ने माना कि आरोपियों ने संगठित होकर सार्वजनिक स्थल पर हमला किया और पीड़ितों को गंभीर चोटें पहुंचाईं, जो स्पष्ट रूप से जानलेवा इरादे को दर्शाता है।

रितेश निखारे उर्फ मैडी के अलावा जिन आरोपियों को दोषी ठहराया गया, उनमें सिद्धार्थ शर्मा, छोटू शर्मा, फरीद अहमद उर्फ सोनू खान, आयुष मराठा उर्फ बाबृ एम, वरुण डिकेड शर्मा उर्फ प्रिंस शर्मा, काव्य गढ़वाल, रूपेश दुबे, आदित्य प्रकाश दुबे, सोनू माली उर्फ आशीष माली, मोहम्मद साबिर उर्फ रान, विकास वैष्णव उर्फ बाबा राजू, विराज सिंह ध्रुव और गोलू विदेशी शामिल हैं।

घटना 6 मई 2023 की रात की है, जब होटल के सामने शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा। आरोपियों ने समूह बनाकर हमला किया और पीड़ित पक्ष को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना से इलाके में दहशत फैल गई थी।

अगले ही दिन पुलिस ने अपराध दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी 13 आरोपियों को क्रमशः गिरफ्तार किया। 24 जुलाई 2023 को न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया। इसके बाद लंबी सुनवाई, गवाहों के बयान और साक्ष्यों की गहन पड़ताल चली।

करीब ढाई साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 28 फरवरी 2026 को अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। फैसले के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी की कि सार्वजनिक स्थानों पर सामूहिक हिंसा और जानलेवा हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

अदालत के इस फैसले को शहर में कानून व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बहुचर्चित प्रकरण पर न्यायिक विराम लगने के साथ ही यह स्पष्ट संदेश गया है कि कानून हाथ में लेने वालों को कठोर दंड भुगतना ही पड़ेगा।

हैवेंस पार्क होटल कांड का यह निर्णय न केवल पीड़ित पक्ष के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि संगठित अपराध और सार्वजनिक हिंसा के खिलाफ न्यायपालिका सख्त रुख अपनाए हुए है।

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