बिलासपुर। नेहरू नगर स्थित नारायणा ई-टेक्नो स्कूल से जुड़ा विवाद अब गंभीर शिक्षा घोटाले की शक्ल लेता नजर आ रहा है। मान्यता, फीस वसूली और CBSE के नाम पर पढ़ाई जैसे आरोपों के बीच अब “एक शहर में पढ़ाई और दूसरे शहर में परीक्षा” का मामला सामने आने के बाद पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हलचल तेज कर दी है।
इस पूरे मामले को केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तर पर हस्तक्षेप किया है। उन्होंने सभी दस्तावेज और शिकायतों की सॉफ्ट कॉपी प्रदेश के प्रमुख सचिव को भेजते हुए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया है।
मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि स्कूल की मान्यता की स्थिति की विस्तृत जांच की जाए। यदि संस्थान को वैध मान्यता प्राप्त नहीं है, तो कक्षा 1 से 7 तक प्रवेश किस आधार पर दिया गया और अभिभावकों को किन तथ्यों के आधार पर भरोसे में लिया गया—यह जांच का अहम बिंदु होगा।
CBSE के नाम पर पढ़ाई का मुद्दा भी विवाद के केंद्र में है। सवाल उठ रहे हैं कि जब स्कूल राज्य बोर्ड के अंतर्गत आता है, तो CBSE पैटर्न की पढ़ाई क्यों कराई जा रही है। वहीं, यदि पढ़ाई CBSE के अनुसार हो रही है, तो छात्रों को छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षा में बैठाने की तैयारी क्यों की जा रही है। मंत्री ने इसे बच्चों के भविष्य के साथ संभावित खिलवाड़ बताया है।
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू बहु-शहर संचालन और छात्र उपस्थिति से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, स्कूल रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में संचालित हो रहा है, लेकिन आरोप है कि कम छात्र संख्या के बावजूद एक ही छात्रों की उपस्थिति अलग-अलग शहरों में दर्ज की जा रही है। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि एक शहर में पढ़ाई दिखाकर वही छात्र दूसरे शहर में परीक्षा दे रहे हैं, जो परीक्षा प्रणाली में गंभीर गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
मंत्री ने निर्देश दिया है कि वास्तविक छात्र संख्या, उनकी उपस्थिति और परीक्षा केंद्रों में सत्यापन की प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जाए। उन्होंने इस पूरे नेटवर्क को संगठित अनियमितता की आशंका के रूप में चिन्हित किया है।
फीस वसूली को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया है। यह जांच की जाएगी कि फीस किस आधार पर तय की जा रही है, उसका उपयोग कैसे हो रहा है और क्या अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। साथ ही किताबों और अन्य शैक्षणिक सामग्री से जुड़े वेंडर नेटवर्क की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
अपने पत्र में मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, प्रबंधन या संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखने और निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास कायम रह सके।
नारायणा ई-टेक्नो स्कूल का यह मामला अब केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, नियामक तंत्र और अभिभावकों के भरोसे से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। केंद्र के सीधे हस्तक्षेप के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच कितनी गहराई तक जाती है और क्या इस कथित “डबल खेल” का पूरा सच सामने आ पाता है।


