Monday, March 23, 2026
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CBSE के नाम पर फीस वसूली, डबल रोल नंबर और यू-डाइस गड़बड़ी—नारायण ई-टेक्नो स्कूल और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल…

बिलासपुर। नेहरू नगर स्थित नारायण ई -टेक्नो स्कूल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। सामने आए तथ्यों ने न सिर्फ स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी की विश्वसनीयता को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।

सबसे बड़ा विवाद CBSE संबद्धता को लेकर सामने आया है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने पिछले एक वर्ष से CBSE के नाम पर भारी फीस वसूली, जबकि वास्तविक संबद्धता 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी बताई जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बिना वैध मान्यता के CBSE पाठ्यक्रम कैसे संचालित हुआ और छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए दूसरे शहरों में क्यों भेजा गया।

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू “डबल रोल नंबर” का है। जानकारी के अनुसार, कुछ छात्रों का नामांकन बिलासपुर में दर्ज है, जबकि वही छात्र रायपुर में परीक्षा देते नजर आए। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

इसके साथ ही यू-डाइस नंबर को लेकर भी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। नियमों के अनुसार यू-डाइस कोड जारी करने का अधिकार केवल DPI को है, लेकिन आरोप है कि बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा ही छात्रों को यू-डाइस नंबर जारी किए गए। यह न केवल प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि पूरे सिस्टम में जवाबदेही की कमी को भी उजागर करता है।

जिला शिक्षा विभाग की भूमिका भी इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। आरोप है कि यू-डाइस, नामांकन और परीक्षा से जुड़ी विसंगतियों की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हाल ही में जारी एक आदेश को स्कूल प्रबंधन द्वारा इस तरह प्रस्तुत किया गया, मानो संस्था को पूर्ण संबद्धता प्राप्त हो, जबकि उस आदेश में CBSE का स्पष्ट उल्लेख ही नहीं है। इससे अभिभावकों के बीच भ्रम और असंतोष और गहरा गया है।

अभिभावकों ने आर्थिक शोषण के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शासन द्वारा निर्धारित पुस्तकों के बजाय महंगी निजी किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया गया। इसके अलावा पूरी यूनिफॉर्म किट खरीदने का दबाव बनाया गया, भले ही उसकी आवश्यकता आंशिक ही क्यों न हो। यह स्थिति एक गैर-लाभकारी शैक्षणिक संस्था की मूल भावना के विपरीत मानी जा रही है।

वित्तीय लेनदेन को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। NSPIRA नामक संस्था, जिसे नारायण एजुकेशन सोसाइटी की सिस्टर कंसर्न बताया जा रहा है, के माध्यम से यूनिफॉर्म और किताबों की आपूर्ति की जा रही है। आरोप है कि फीस और अन्य भुगतान सीधे स्कूल के बजाय बाहरी खातों में जमा कराए गए, जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी कम गंभीर नहीं हैं। जानकारी के अनुसार, कर्मचारियों का PF और ESI छत्तीसगढ़ के बजाय नेल्लौर और मुंबई स्थित खातों में जमा किया जा रहा है। इससे भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में कर्मचारियों को दूसरे राज्यों में भटकना पड़ सकता है, जो श्रम कानूनों और स्थानीय जवाबदेही दोनों के लिए चिंताजनक है।

इसी बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि स्कूल प्रबंधन अब कुछ चयनित अभिभावकों के माध्यम से अपनी स्थिति को सही ठहराने की रणनीति बना रहा है। इसके तहत जिला प्रशासन के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत कर यह संदेश देने की कोशिश की जा सकती है कि सभी आरोप निराधार हैं और संस्था वैध रूप से संचालित है।

पूरा मामला एक बड़े पैटर्न की ओर इशारा करता है, जहां निजी शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक निगरानी और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अभिभावकों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है और यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो विरोध और घेराव की स्थिति भी बन सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह केवल एक संस्थान की मनमानी है, या फिर सिस्टम की चुप्पी ने इस पूरे मामले को इतना बढ़ने दिया है?

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