Wednesday, January 14, 2026
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सरकार के साथ पांचवें दौर की बातचीत से पहले किसानों ने दी भारत बंद की चेतावनी, जानें किसान आंदोलन से जुड़ी 10 बड़ी बातें…

नए कृषि कानून के खिलाफ नौ दिनों से सड़कों पर आंदोलन कर रहे किसानों ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर मांगें नहीं मानी गई तो आठ दिसंबर को भारत बंद करेंगे। किसानों ने कहा कि उस दिन वे टोल प्लाजा को भी घेर लेंगे। सरकार के साथ पांचवे दौर की बातचीत से पहले किसान नेताओं ने यह चेतावनी दी है।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार शनिवार की वार्ता के दौरान उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती है, तो वे नए कृषि कानूनों के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज करेंगे। एक अन्य किसान नेता हरविंदर सिंह लखवाल ने कहा, आज की हमारी बैठक में हमने आठ दिसंबर को ‘भारत बंद’ का आह्वान करने का फैसला किया है, जिस दौरान हम सभी टोल प्लाजा पर भी कब्जा कर लेंगे। उन्होंने कहा, यदि इन कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो हमने आने वाले दिनों में दिल्ली की शेष सड़कों को अवरूद्ध करने की योजना बनाई है।

आइए जानतें हैं किसान आंदोलन से जुड़ी अब तक की दस बड़ी बातें:

1. दिल्ली के बॉर्डर बिंदुओं पर पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के किसानों का प्रदर्शन लगातार नौ दिनों से जारी है। किसान नेताओं और सरकार के बीच गुरुवार को हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका था। प्रदर्शनकारी किसानों को आशंका है कि केंद्र सरकार के कृषि संबंधी कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और किसानों को बड़े औद्योगिक घरानों की अनुकंपा पर छोड़ दिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को उम्मीद है कि पांच दिसंबर को पांचवें चरण की वार्ता के दौरान सरकार उनकी मांगें मान लेगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम विरोध प्रदर्शन तेज कर देंगे।

2. किसान नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि एमएसपी हमारी बुनियादी जरूरत का हिस्सा है। अब ये केवल किसान आंदोलन नहीं है ये जनआंदोलन बन चुका है। सरकार को किसानों की बात माननी होगी। किसान शनिवार को सरकार के साथ होने वाली बैठक के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। आपको बता दें कि आंदोलन कर रहे किसानों के प्रतिनिधियों और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच कई दौर की बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका। दोनों पक्ष शनिवार को फिर से बैठक करेंगे।

3. केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को जारी रखने के लिए कार्यकारी आदेश ला सकती है। शुक्रवार को किसान संगठनों के साथ होने वाली बैठक में सरकार की तरफ से इस किस्म का प्रस्ताव रखा जा सकता है। इसके अलावा अन्य मांगों को पूरा करने के लिए संबंधित कानूनों के नियमों में बदलाव किए जाने की संभावना है। हालांकि किसान संगठन इसके लिए तैयार होंगे, इसकी उम्मीद कम है। बता दें कि कार्यकारी आदेश के जरिये भी कानून बनाया जा सकता है। देश में कई कानून हैं जो कार्यकारी आदेश के जरिये बनाए गए हैं।

4. कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गुरुवार की बैठक में किसान संगठनों की ओर से नए तीन कृषि कानूनों को लेकर आपत्तियों पर विचार किया गया है। किसानों की सबसे बड़ी मांग एमएसपी जारी रखने को लेकर कानूनी प्रावधानों करने की है। इसके लिए सरकार कार्यकारी आदेश का रास्ता अपना सकती है। ऐसा करने से किसानों की चिंता दूर हो जाएगी और मंडियों व खुले बाजार में कृषि उपज एमएसपी पर बिकने का रास्ता साफ हो जाएगा।

5. अधिकारी के मुताबिक, ठेका खेती में किसान व कंपनी के बीच विवाद होने पर एसडीएम-डीएम कोर्ट के अलावा किसानों को अदालत की शरण में जाने का विकल्प रहेगा। इसके लिए कानून के नियमों में बदलाव किया जा सकता है। आवश्यक खाद्य नियम में खरीद की सीमा हटाने को लेकर पैन कार्ड के अलावा कंपनी को पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा खुले बाजार में टैक्स लागू करने अथवा राज्य सरकार से सरकारी मंडियों मे टैक्स समाप्त करने की अपील कर सकती है। इस दिशा में सरकार पहल कर सकती है।

6. इसके अलावा संशोधित बिजली विधेयक, पराली पर जुर्माना, किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने जैसी मांगों को मान लेने की संभावना है। अधिकारी ने बताया कि तीनों कृषि कानून में संशोधनों के जरिए किसानों की मांग पूरी कर किसानों से आंदोलन समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन किसान संगठन पहले ही कह चुके हैं कि पहले संसद का विशेष सत्र बुलाकर तीनों कृषि कानून रद्द किए जाएं। इसके बाद एमएसपी को लेकर नया कानून बनाया जाए जिसमें किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व हो। सरकार इसके लिए तैयार नहीं है, जिससे टकराव व आंदोलन समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

7. किसान आंदोलन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें दिल्ली की सीमाओं पर जमे किसानों को हटाने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली-एनसीआर के सीमावर्ती इलाकों से किसानों को प्रदर्शन से तुरंत हटाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस प्रदर्शन से कोविड-19 के प्रसार का खतरा पैदा हो गया है। साथ ही लोगों को आने-जाने में भी दिक्कत हो रही है। याचिका में कहा गया है कि प्राधिकारियों को बॉर्डर खुलवाने के आदेश दिए जाएं। साथ ही किसी निश्चित स्थान पर सामाजिक दूरी और मास्क आदि के साथ प्रदर्शन को शिफ्ट किया जाए।

8. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा किसान आंदोलन पर की गई टिप्पणी को लेकर भारत सख्त हो गया है। शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कनाडाई उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय द्वारा तलब किया गया और कड़ी भाषा मे डिमार्शे जारी कर कनाडा से आपसी संबंधों पर असर पड़ने की चेतावनी दी गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसानों के मुद्दों पर कनाडा के नेताओं की टिप्पणी हमारे आंतरिक मामलों में बर्दाश्त नहीं करने लायक हस्तक्षेप है। मंत्रालय ने उच्चायुक्त से कहा कि भारतीय किसानों से संबंधित मुद्दों पर कनाडा के प्रधानमंत्री, कुछ कैबिनेट मंत्रियों और संसद सदस्यों की टिप्पणी हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है, इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

9. बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने केंद्र के नए कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताते हुए आंदोलन का ऐलान किया है। उनकी अगुवाई में महागठबंधन के नेता शनिवार को गांधी मैदान में गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना देंगे। शुक्रवार को राजद कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र के किसान और मजदूर विरोधी फैसलों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी सहभागी हैं। केंद्र सरकार आज जो बातचीत कर रही है, वह कानून बनाने से पहले होनी चाहिए थी। उन्होंने राज्य के सभी किसानों और संगठनों से बिल के खिलाफ सड़कों पर उतरने की अपील की।

10. पटना में चल रही भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी की बैठक में दूसरे दिन नये कृषि कानूनों को लेकर चल रहे आंदोलन पर चर्चा हुई। बैठक में पार्टी के महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य सहित देश के विभिन्न इलाकों से पार्टी के नेता भाग लिया। बैठक में तय हुआ कि कृषि बिलों की वापसी की मांग पर भाकपा-माले पांच दिसंबर को पूरे बिहार में चक्का जाम करेगा। यह चक्का जाम आंदोलन भाकपा-माले, अखिल भारतीय किसान महासभा व अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के संयुक्त बैनर से आयोजित होगा। यदि मांगें पूरी नहीं हुई और सरकार तीनों कानूनों को रद्द नहीं करती, तब अनिश्चितकालीन सत्याग्रह व चक्का जाम होगा।

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