रायगढ़ जिले में स्थित एनटीपीसी लारा प्लांट में एक शातिर ठग ने अधिकारियों को धोखा देकर गिट्टी-रेत का ठेका दिलाने का बड़ा खेल रचने की कोशिश की, लेकिन उसकी चालाकी ज्यादा देर नहीं चल पाई। इस शख्स ने खुद को केंद्रीय सहायक श्रम आयुक्त बताकर अधिकारियों पर दबाव डालने की कोशिश की, लेकिन CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के सतर्क जवानों ने उसकी नौटंकी पकड़ ली और उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पुसौर पुलिस ने आरोपी के पूरे ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है।
यह घटना 27 मार्च 2025 की है, जब ऋत्विक कुमार षडंगी नाम के एक व्यक्ति ने एनटीपीसी लारा प्लांट में घुसकर गिट्टी और रेत का ठेका दिलाने के लिए अधिकारियों पर दबाव डाला। आरोपी ने फर्जी आईडी कार्ड और नकली दस्तावेजों का सहारा लिया, और यहां तक कि एनटीपीसी प्रबंधन के मानव संसाधन (HR) विभाग से अनुरोध किया कि वह एक “विशेष अधिकारी” है और उसे रिसीव किया जाए। उसने विजिटर पास बनवाकर प्लांट के भीतर प्रवेश किया और अधिकारियों पर अपनी धाक जमाने की कोशिश की।
बीएचईएल (BHEL) के अधिकारियों ने जब ऋत्विक के हाव-भाव और उसके दबंग लहजे पर शक किया, तो उन्होंने श्रम विभाग से उसकी जानकारी की पुष्टि करने का निर्णय लिया। जांच के बाद सामने आया कि ऋत्विक कुमार षडंगी नाम का कोई व्यक्ति केंद्रीय सहायक श्रम आयुक्त नहीं था। जैसे ही फर्जी अधिकारी होने का खुलासा हुआ, CISF ने तुरंत अपनी क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को अलर्ट किया। बिना देर किए CISF के जवानों ने आरोपी को पकड़ लिया और पुसौर पुलिस को सौंप दिया।
पुसौर पुलिस ने जब आरोपी से गहन पूछताछ की, तो उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसका पूरा खेल गिट्टी-रेत का ठेका दिलाने के लिए रचा गया था। इसके लिए उसने फर्जी दस्तावेज, नकली आईडी कार्ड और कूट रचित सरकारी लेटर तैयार किए थे। पुलिस को उसके पास से सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय) बिलासपुर का फर्जी लेटर, नकली सील, और आधार कार्ड भी बरामद हुआ।
CISF कंपनी कमांडर की शिकायत पर पुसौर थाना में आरोपी ऋत्विक कुमार षडंगी के खिलाफ अपराध क्रमांक 75/2025 के तहत धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2) बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।
रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) दिव्यांग कुमार पटेल के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी) आकाश मरकाम के मार्गदर्शन में पुसौर थाना प्रभारी रोहित कुमार बंजारे और उनकी टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस पूरे अभियान में CISF टीम की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने आरोपी की नौटंकी को समय रहते पकड़कर बड़े ठगी गिरोह के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
फर्जी अफसर बनने की यह कोशिश आरोपी को सीधा जेल की सलाखों के पीछे ले गई। पुलिस अब इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है, ताकि इस ठगी के पीछे छिपे अन्य अपराधियों का भी पता लगाया जा सके। इस घटना से एक बार फिर यह साबित हो गया कि सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से बड़े अपराधों को समय रहते रोका जा सकता है।


