रायपुर, छत्तीसगढ़। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक ऐसा पल साझा किया जिसने सदन के भीतर भावनात्मक माहौल बना दिया। अपने X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर उन्होंने लिखा कि सदन की कार्यवाही के दौरान भाषण से पहले उन्हें एक पर्ची मिली, जिसमें उनके पुत्र चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी की सूचना थी। इस सूचना के बावजूद उन्होंने अपना भाषण पूरा किया और इस घटना की तुलना भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के एक ऐतिहासिक क्षण से की।
भूपेश बघेल ने बताया कि जब उन्हें यह पर्ची मिली, उस वक्त नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत उनके बगल में बैठे थे और उन्होंने पूछा कि पर्ची में क्या लिखा है। उसी क्षण उन्हें सरदार पटेल से जुड़ी एक प्रेरणादायक घटना याद आ गई। उन्होंने लिखा:
“किसी केस की सुनवाई के दौरान जब सरदार पटेल बतौर वकील जिरह कर रहे थे, तभी उन्हें एक पर्ची दी गई थी। उन्होंने उसे पढ़ा, चुपचाप जेब में रख लिया और अपनी बहस पूरी की। बाद में पता चला कि उस पर्ची में उनकी पत्नी के निधन की सूचना थी। इसके बावजूद उन्होंने अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा और केस जीता।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे लिखा कि जब उन्हें आज अपने बेटे की गिरफ्तारी की सूचना मिली, तो उन्होंने सरदार पटेल की उसी भावना को आत्मसात किया और बिना विचलित हुए अपना भाषण पूरा किया।
उन्होंने लिखा:
“सरदार पटेल की उस घटना के सामने हम बेहद छोटे हैं, लेकिन हम उन्हीं के वंशज हैं। हमें न डरना है, न झुकना है।”
भूपेश बघेल की यह पोस्ट न केवल उनके व्यक्तिगत साहस को दर्शाती है, बल्कि राजनीतिक कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और मानसिक दृढ़ता की मिसाल भी पेश करती है। सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को व्यापक समर्थन और सहानुभूति मिल रही है।
राजनीतिक हलचल तेज
भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के पीछे की वजहों को लेकर फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता सकती है, वहीं भाजपा की प्रतिक्रिया का भी इंतजार है।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि राजनीति में निजी जीवन और सार्वजनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कैसे साधा जाए। भूपेश बघेल का यह शांत और सधे हुए तरीके से सामने आना एक उदाहरण बन सकता है।