Saturday, August 30, 2025
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बिलासपुर हाईवे जाम पर हाईकोर्ट की सख्त: रसूखदारों की दबंगई पर जताई नाराजगी, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नेशनल हाईवे-130 को लग्जरी कारों की रैली निकालकर जानबूझकर बाधित करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ—मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु ने इसे जनहित याचिका में बदलते हुए सुनवाई प्रारंभ कर दी है। कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताते हुए सख्त टिप्पणी की कि जब हाईवे को अवैध रूप से रोका गया था, तो वाहन जब्त क्यों नहीं किए गए?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजपा कांग्रेस नेता के करीबी कुछ युवकों ने नई लग्जरी कारें खरीदने के बाद उनका प्रदर्शन करने के उद्देश्य से हाईवे पर जश्न मनाया। बिलासपुर के रतनपुर रोड पर कारों को एक के बाद एक खड़ा कर पूरी सड़क को जाम कर दिया गया। ड्रोन कैमरे से इस रैली का वीडियो शूट किया गया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। इस दौरान सड़क पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

चालान काटकर किया मामला खत्म

ट्रैफिक पुलिस की ओर से इस मामले में केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई करते हुए कार मालिकों पर ₹2000-₹2000 का जुर्माना लगाया गया। न कोई एफआईआर दर्ज हुई, न ही कोई वाहन जब्त किया गया। यही नहीं, आरोपित युवकों की पहचान या उनके वाहनों के नंबर भी सार्वजनिक नहीं किए गए। इस लापरवाही पर अदालत ने नाराजगी जताई और कहा कि जब वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, तब इतनी कमजोर कार्रवाई क्यों की गई?

हाईकोर्ट ने पूछे तीखे सवाल

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जब मामला स्पष्ट रूप से कानून व्यवस्था को चुनौती देता है, तो कठोर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?” कोर्ट ने यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाएं आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करती हैं और यह अराजकता की तरफ इशारा करती हैं।

पुलिस को देना होगा विस्तृत जवाब

कोर्ट ने बिलासपुर पुलिस को निर्देश दिया है कि वह पूरे घटनाक्रम का विस्तृत ब्यौरा शपथपत्र के साथ अगली सुनवाई में प्रस्तुत करे। साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि रसूख और रुतबे के आधार पर कानून को हल्के में लेना स्वीकार्य नहीं है।

कौन थे आरोपी?

एडिशनल एसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे के अनुसार, इस मामले में वेदांश शर्मा, सिद्धार्थ शर्मा, यशवंत, दुर्गेश ठाकुर, विपिन वर्मा और अभिनव पांडेय जैसे युवक शामिल थे। सभी पर केवल मामूली चालान की कार्रवाई की गई, जबकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से साफ दिखता है कि उन्होंने जानबूझकर नियमों की अवहेलना की।

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