बिलासपुर (छत्तीसगढ़) | 11 फरवरी 2026। बिलासपुर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) ने आरोप लगाया है कि चुनावी लाभ के उद्देश्य से कांग्रेस समर्थकों और अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। इस संबंध में जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी ने जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
शिकायत पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में SIR के अंतर्गत मतदाताओं की सुनवाई प्रक्रिया चल रही है, जिसका अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को प्रस्तावित है। इसी बीच आरोप है कि कुछ राजनीतिक तत्वों द्वारा ‘फार्म-7’ का दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश की जा रही है। विजय केशरवानी का दावा है कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे जिले से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जहां भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता दबाव बनाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक समाज के लोगों के नाम हटवाने के लिए फार्म भरवा रहे हैं।

बूथ स्तर पर गड़बड़ी के गंभीर आरोप
कांग्रेस ने बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के चांटीडीह इलाके का विशेष रूप से उल्लेख किया है। पत्र के अनुसार—
- बूथ क्रमांक 191 में 10,
- बूथ क्रमांक 192 में 15,
- और बूथ क्रमांक 193 में 92 मतदाताओं को चिन्हित किया गया है।
कांग्रेस का दावा है कि ये सभी मतदाता वर्ष 2003 से लगातार उसी क्षेत्र में निवासरत हैं और उनके पास निवास प्रमाण पत्र सहित सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद उनके नाम काटने की प्रक्रिया शुरू की गई है। आरोप यह भी है कि संबंधित बीएलओ (BLO) पर ऊपर से दबाव बनाया जा रहा है कि वे इन फार्म-7 को स्वीकार करें, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।
SIR के उद्देश्य पर उठे सवाल
विजय केशरवानी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है और इसका इस्तेमाल निष्पक्ष मतदाता सूची तैयार करने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
प्रशासन से कांग्रेस की प्रमुख मांगें
जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें की हैं—
- फार्म-7 के दुरुपयोग पर तत्काल रोक लगाई जाए और बिना भौतिक सत्यापन के स्वीकार किए गए फार्मों की गहन जांच कराई जाए।
- दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, जो फर्जी तरीके से मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश कर रहे हैं।
- बीएलओ को राजनीतिक दबाव से मुक्त वातावरण प्रदान किया जाए, ताकि वे निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
राजनीतिक माहौल गरम
चुनाव से पहले सामने आए इन आरोपों ने बिलासपुर जिले की राजनीति में नई सरगर्मी पैदा कर दी है। कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला बताया है। वहीं अब सभी की निगाहें जिला निर्वाचन अधिकारी के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराता है या मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाता है।


