Monday, February 16, 2026
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सड़कों पर उतरा सर्व आदिवासी समाज, चक्काजाम–बंद के बीच एसडीएम और टीम पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग…

अंबिकापुर। कथित रूप से मारपीट से एक आदिवासी बुजुर्ग की मौत के बाद कुसमी क्षेत्र में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। घटना को लेकर सर्व आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर कुसमी बंद का आह्वान किया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।

कुसमी के शिव चौक पर सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, आश्रितों को शासकीय नौकरी तथा मारपीट के आरोपियों पर हत्या का अपराध दर्ज कर फांसी की सजा देने की मांग शामिल है। प्रदर्शन के कारण क्षेत्र में यातायात पूरी तरह बाधित हो गया, वहीं पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर तैनात रही।

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा विवाद एसडीएम करुण डहरिया को लेकर सामने आ रहा है, जिन्हें हत्या के आरोप में हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि करुण डहरिया का विवादों से पुराना नाता रहा है। उन पर रिश्वतखोरी और अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप पहले भी लग चुके हैं।

वर्ष 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी करुण डहरिया को वर्ष 2022 में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। उस समय वे गरियाबंद जनपद में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। आरोप था कि उन्होंने बोरवेल खनन का बिल पास करने के बदले रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के बाद एसीबी ने उन्हें कार्यालय में ही रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किया था। जेल जाने के बाद उन्हें निलंबित भी किया गया था, हालांकि जमानत पर बाहर आने के बाद निलंबन से बहाल कर दिया गया।

इसके अलावा बलरामपुर जिले में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक युवक के साथ मारपीट करने, कॉलर पकड़ने जैसे आरोप भी उन पर लग चुके हैं। कुसमी क्षेत्र में गलत कार्यों का विरोध करने वाले लोगों को झूठे मामलों में फंसाने, शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और जेल भिजवाने जैसे गंभीर आरोपों से भी वे पहले से घिरे रहे हैं।

आदिवासी बुजुर्ग की मौत के बाद अब यह मामला और तूल पकड़ता जा रहा है। सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करना बड़ी चुनौती बन गया है।

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