बलरामपुर जिले के कुसमी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत हंसपुर में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे अंचल को झकझोर कर रख दिया है। बीती रात करीब 8 बजे खेत में पानी पटाने का कार्य कर रहे तीन आदिवासी ग्रामीणों के साथ कथित तौर पर एसडीएम करुण कुमार डहरिया सहित चार लोगों द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई। इस मारपीट में 62 वर्षीय रामनरेश उरांव की मौके पर ही हालत गंभीर हो गई, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं दो अन्य घायल ग्रामीणों का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जारी है।
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी के निर्देश पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा मारपीट कर हत्या करने की बात स्वीकार की गई। इसके बाद एसडीएम करुण कुमार डहरिया, विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजीत कुमार यादव एवं सुदीप यादव के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पुलिस का कहना है कि इस प्रकरण में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी थार और बोलेरो वाहन से ग्राम पंचायत हंसपुर क्षेत्र में कथित बॉक्साइट खनन से जुड़े ट्रक पकड़ने गए थे। इसी दौरान खेत में काम कर रहे आदिवासी ग्रामीणों से उनका विवाद हुआ, जो बाद में हिंसक मारपीट में बदल गया।
मृतक रामनरेश उरांव का पोस्टमार्टम शंकरगढ़ के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रभात भगत, बीएमओ आफताब अंसारी, कुसमी के चिकित्सक डॉ. राकेश ठाकुर एवं शशिकला तिर्की की टीम द्वारा किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से मारपीट से मृत्यु की पुष्टि हुई है।
घटना से आक्रोशित सर्व आदिवासी समाज, स्थानीय ग्रामीणों एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने “हत्यारों को फांसी दो” के नारों के साथ काका लरंग साय चौक स्थित मुख्य सड़क पर सांकेतिक चक्का जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों में कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरिहर यादव, पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम, लालसाय मिंज, संतोष इंदवार, दीपक बनकर सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। पुलिस की समझाइश के बाद चक्का जाम समाप्त कराया गया।
पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं आदिवासी समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।


