छत्तीसगढ़स्वास्थ्य

स्वास्थ्य मंत्री के प्रभारी जिले में..स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल

स्वास्थ्य मंत्री के प्रभारी जिले में..स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल

                     मुंगेली..संजय जायसवाल

मुंगेली…जिले का सबसे बड़ा अस्पताल कहलाने वाला जिला चिकित्सालय अपने लचर अर्थ व्यवस्था के चेलते रेंग रेंग कर चलने को मजबूर है प्रदेश सरकार द्वारा जिले को चिकित्सा लाभ देने के मकसद से करोड़ो रुपयो की लागत से भवन का निर्माण करा तो दिया लेकिन इस जिला अस्पताल को जरूरत के हिसाब से संसाधन देना भूल गयी यही वजह है कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रो से आये हुए ग्रामीण बेहतर ईलाज की आश में यहां पहुंचते है लेकिन यहाँ आम लोगो के  तकलीफों के हिसाब से स्पेशलिस्ट नही होने के चलते उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है यहां तो दुर्घटना ग्रस्त जोभी पीड़ित पहुंचते है उन्हें ईलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हुए सीधे बिलासपुर के सिम्स रिफर कर दिया जाता है आम लोगो का कहना है कि जिस जिले का प्रभारी खुद प्रदेश का स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर हो जो प्रदेश में अपने तेज तर्रार अंदाज के लिए जाने जाते है उस जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ जिले के रहवासियों को नही मिल पाना शासन की कार्यप्रणाली पर सवालियां निशान उठा रहा है यहां के आम नागरिकों के द्वारा जिला बनने के बाद से ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की मांग करती आई है आज के समय मे जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में महिला डॉक्टर की कमी सबसे ज्यादा खलती है यहां पर महिला उत्पीड़िन या महिलाओ से सम्बंधित कोई भी मामला आता है तो महिला डॉक्टर की कमी के चलते पीड़ित को कई अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते है कि बार तो ऐसे हालात बने है कि जिला अस्पताल के मामले को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भेजा गया है जिसके चलते पुलिस प्रशासन सहित पीड़ित को भी भारी कष्टों का सामना करना पड़ा है आम लोगो के द्वारा यहां के अर्थ व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है और अगर आगे भी यही हालात रहे तो कभी भी आम लोगो का गुस्सा फूट सकता है यहां के स्थानीय जनप्रीतिनिधियो की उदासीनता के चलते जिला बनने के 6 साल बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर आमलोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है जिससे के प्रदेश शासन की छवि आम लोगो के सामने धूमिल हो रही है अगर ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले आम चुनावों में आम जनता अपना आक्रोश शासन के विरुद्ध जता सकती है जिसका एक बड़ा नुकसान मौजूदा प्रदेश सरकार को उठाना पड़ सकता है।

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