नगर निगमबिलासपुर

बिलासपुर: सीएमडी कॉलेज के कब्जे में निगम की जमीन…बना लिया आलीशान कांपलेक्स…आयुक्त को पता ही नहीं… मेयर रामशरण ने कहा- कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है…तो शेख नजीरुद्दीन ने किया कब्जेधारी का बचाव…

बिलासपुर। नगर निगम की अरबों रुपए की बेशकीमती जमीन पर सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन ने आलीशान कांपलेक्स बना लिया है। इसकी जानकारी नए आयुक्त अजय त्रिपाठी को नहीं है। मेयर रामशरण यादव ने मामले को क्लीयर करते हुए कहा कि हाईकोर्ट से उन्हें स्टे मिला हुआ है। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। स्टे के बाद भी लगातार निर्माण करने के सवाल पर सभापति शेख नजीरुद्दीन कब्जेधारी के बचाव में आ गए।

मेयर रामशरण यादव, सभापति नजीरुद्दीन और नए आयुक्त त्रिपाठी ने शुक्रवार शाम विकास भवन स्थित दृष्टि सभाकक्ष में संयुक्त पत्रवार्ता ली। इस दौरान उन्होंने स्वच्छता में बिलासपुर को 114 शहरों में से 7वां रैंक मिलने पर खुशी जाहिर की और अगले साल इससे भी अच्छा रैंक लाने के लिए कड़ी मेहनत करने की बात कही। उन्होंने पत्रकारों से सवाल और सुझाव आंमत्रित किए। इस दौरान एक पत्रकार ने पूछा कि नगर निगम गरीब और अमीर को लेकर भेदभाव बरत रहा है। गरीब जैसे ही कब्जा कर मकान बनाता है तो निगम तत्काल पहुंचकर तोड़वा देता है। वहीं, अमीर के कब्जे को हटाने में ध्यान नहीं देता। सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन संजय दुबे ने निगम की जमीन पर आलीशान कांपलेक्स बना लिया है। इसकी शिकायत नींव लेबल से हुई थी, लेकिन अब आलीशान कांपलेक्स बनने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा क्यों… नगर निगम आयुक्त त्रिपाठी इस मामले में अंजान नजर आए। फिर मेयर रामशरण यादव ने कहा कि नगर निगम जरूर कार्रवाई करेगा। पहले ही उन्हें कई बार नोटिस दिया गया था, लेकिन वे कोर्ट से स्टे लेकर आ गए हैं। कोर्ट के निर्देशानुसार उनकी पूरी जमीन का सीमांकन करने के लिए बिलासपुर एसडीएम को कई पत्र लिखे गए हैं। कार्रवाई जारी है। इस बीच सवाल उठा कि अगर मामले में स्टे मिला हुआ है तो वहां पर लगातार निर्माण कार्य क्यों जारी है। इतने में सभापति शेख नजीरुद्दीन सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन संजय दुबे यानी कि कब्जेधारी के बचाव में कूद पड़े। उन्होंने कहा कि जितना निर्माण हुआ है, वह स्टे मिलने से पहले का था। बताते चलें कि करीब सात माह पहले सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन को कोर्ट से यह आदेश मिला है कि जब तक उनकी पूरी जमीन का सीमांकन नहीं किया जाता, तब तक निगम कोई कार्रवाई नहीं करेगा। उस समय निगम की जमीन पर डोर लेंटर तक स्ट्रक्चर खड़ा हुआ था। निगम की अधिकारियों की शह कहें या मिलीभगत… तब से लेकर अब तक लगातार निर्माण कार्य जारी है। स्ट्रक्चर आलीशान कांपलेक्स का रूप ले चुका है। टाइल्स से लेकर दरवाजे लग चुके हैं। वर्तमान में बिजली फिटिंग का कार्य चल रहा है।

रेवेन्यू, ट्रैफिक और क्राइम रेट के कारण शहर रहने लायक नहीं

स्वच्छता में 7वां रैंक पाकर तो नगर निगम अपना पीठ थपथपा रहा है, लेकिन देशभर में रहने लायक शहरों के मामले में निगम का 52वां स्थान है। पहले यह स्थान 12-13 था। इस सवाल के जवाब में निगम आयुक्त त्रिपाठी ने कहा कि रहने लायक शहर के लिए मापदंड 2018 में बनाए गए थे। अब उसमें विस्तार कर दिया गया है। रहने लायक शहर में रेवेन्यू वसूली, ट्रैफिक की व्यवस्था और क्राइम रेट को देखा जाता है। बिलासपुर निगम में न तो पर्याप्त राजस्व वसूली हो रही है और न ही ट्रैफिक व्यवस्थित है। क्राइम रेट भी अधिक है। यही कारण है कि हमें 52वां स्थान मिला है।

मिशन क्लीन सिटी के तहत शासन को भेजा प्रस्ताव

निगम में शामिल 15 ग्राम पंचायतों में सुविधाएं और सफाई नहीं होने के सवाल पर आयुक्त ने कहा कि मिशन क्लीन सिटी के तहत मैन पावर उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव राज्य शासन के पास विचाराधीन है। मैन पावर मिलते ही सफाई समेत अन्य सुविधाएं वहां भी मुहैया कराएंगे।

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