बिलासपुर: नगर निगम के मठाधीश अफसरों की जकड़ में छटपटा रही हैं अरबों रुपए की योजनाएं…ऐसी कोई योजना नहीं, जो धरातल पर सफल हुई…

विस में उठ चुका है 20 साल से अधिक समय तक पदस्थ अफसरों को हटाने का मामला

“एक नजर बड़ी योजनाओं पर”

योजना लागत (करोड़ में)

स्मार्ट सिटी 39000

सीवरेज 450

अमृत मिशन 400

बिलासपुर। नगर निगम में 30 सालों से अधिक समय से जमे मठाधीश अधिकारियों के कारण सरकारी योजनाओं का कबाड़ा निकल गया है। इनके कार्यकाल में लागू ऐसी कोई योजना नहीं है, जो सफल हुई है। यही वजह है कि सीवरेज के फेल होने के कारण विधानसभा में इन अफसरों को तत्काल हटाने की मांग उठी। विभागीय मंत्री शिव डहरिया ने इन्हें हटाने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन अब इस मामले में राजनीतिक रंग ले लिया है। बिलासपुर शहर के कुछ कांग्रेसी इन्हें बचाने के लिए सामने आ गए हैं। उनका तर्क है कि सीवरेज के फेल होने में अफसरों का कोई दोष नहीं है। पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने सीवरेज में जैसा चाहा, अफसरों ने वैसा काम किया है। बता दें कि नगर निगम के पास अधीक्षण अभियंता, कार्यापालन अभियंता, इंजीनियर से लेकर 44 स्टॉफ है। अब तक जितने भी निगम आयुक्त आए, उन्होंने आधा दर्जन अधिकारियों पर ही भरोसा जताया और उन्हें ही अरबों रुपए के काम का प्रभार दिया।

ये तीन अफसर हैं 30 साल से अधिक समय से पदस्थ

1. पीके पंचायती, कार्यापालन अभियंता : नगर निगम के अस्तित्व में आने के बाद 1986 से ये यहां पदस्थ हैं। शुरुआत में छोटी-छोटी योजनाओं का प्रभार मिला। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बड़ी-बड़ी योजनाएं इनकी देखरेख में संचालित हुईं। वर्तमान में आईएचएसडीपी, व्यापार विहार स्मार्ट सड़क, मिट्‌टीतेल गली स्मार्ट सड़क, गोकुल नगर, ट्रांसपोर्ट नगर, अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी, अरपा साडा, रिकांडो बस्ती के सामने कांपलेक्स निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ट्रांसपोर्ट नगर, ऑडिटोरियम से संबंधित कार्य इनके प्रभार में हैं। ये योजना नगर निगम की सबसे बड़ी योजनाएं हैं।

आरोप: गौरव पथ के निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगा है, जिसकी जांच चल रही है। सीवरेज में अनियमितता के मामले में सस्पेंड हो चुका है। निलंबन अवधि के दौरान पंचायती को जिला अस्पताल में दो माह के लिए अटैच किया गया था। फिर बहाल होकर नगर निगम आ गए।

2. सुरेश बरुआ, प्रभारी कार्यापालन अभियंता : इन्हें भी नगर निगम में नौकरी करते 20 साल से भी अधिक हो गए हैं। कार्यापालन अभियंता पंचायत के प्रभार में जितनी योजनाएं हैं, उसमें एई के रूप में सुरेश बरुआ काम देख रहे हैं। इसके अलावा 450 करोड़ की लागत से बन रही सीवरेज परियोजना और पीएम आवास का काम बरुआ के अकेले प्रभार में है।

आरोप: नगर निगम में रहते हुए कई योजनाओं में गड़बड़ी करके आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए एसीबी ने प्रभारी ईई बरुआ के घर में छापा मारा था। उस समय उनके पास से बेहिसाब बेनामी संपत्ति मिली थी।

3. गोपाल ठाकुर, प्रभारी कार्यापालन अभियंता: नगर निगम में 20 साल से अधिक समय से पदस्थ हैं। नगर निगम की मुख्य शाखा भवन शाखा होती है, जिसका प्रभार बीते 10 सालों से गोपाल ठाकुर के पास है। निगम क्षेत्र में कहीं भी निर्माण हो तो भवन शाखा से उसका नक्शा पास कराना अनिवार्य होता है। इस विभाग की इजाजत के बिना निगम सीमा में कहीं भी निर्माण नहीं हो सकता।

आरोप: वैसे तो लिखित रूप से प्रभारी कार्यपालन अभियंता ठाकुर के खिलाफ किसी तरह का आरोप नहीं लगा है, लेकिन रेलवे क्षेत्र को छोड़कर निगम सीमा में ऐसा कोई वार्ड नहीं जहां अवैध निर्माण न हुआ हो। नरेश बाजार के पीछे आवासीय प्लाट में व्यावसायिक निर्माण कर व्यवसाय किया जा रहा है। भक्त कंवर राम मार्केट में कई दुकानों के ऊपर दुकानों का निर्माण करा लिया गया है, लेकिन उसका नक्शा पास नहीं हुआ है। इसकी जानकारी होने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने से गोपाल ठाकुर पर मौन सहमति का मौखिक आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं।

धर्मजीत ने हटाने की मांग उठाई थी

हाल ही में संपन्न मानसून सत्र के दौरान लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह ने सदन में मामला उठाते हुए कहा था कि बिलासपुर नगर निगम में 20 सालों से कुंडली मारकर अफसर बैठे हुए हैं। इनके रहते बिलासपुर शहर का भला नहीं हो सकता। इन्हीं की वजह से सीवरेज जैसी अच्छी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। इसलिए इन्हें तत्काल हटा देना चाहिए।

विधायक शैलेश ने सीवरेज के आंकड़े पर जताई थी आपत्ति

बिलासपुर विधायक शैलेश पांडेय ने सदन में नगर निगम की ओर से पेश सीवरेज के आंकड़ों पर जमकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि पिछले साल विधानसभा में नगर निगम ने सीवरेज का काम 2 प्रतिशत शेष बताया था, जबकि इस बार 15 प्रतिशत काम शेष बताया गया है। 13 प्रतिशत काम जानबूझकर बढ़ाकर लागत बढ़ा दी गई है। यह क्यों किया गया है, सब समझ सकते हैं।

मंत्री ने कहा था- कार्रवाई जरूर होगी

विधायक शैलेश पांडेय और धर्मजीत सिंह द्वारा उठाए गए मामलों के जवाब में विभागीय मंत्री डहरिया ने उन्हें आश्वास्त किया था कि ऐसे अफसरों पर जरूर कार्रवाई होगी। किसी भी अफसर को एक जगह पर इतने सालों तक रहने नहीं दिया जाएगा। सीवरेज के बचे काम के आंकड़े बढ़ने के मामले की भी जांच कराई जाएगी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने किया था अफसरों का बचाव

विधानसभा में मामला उठने के बाद प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अभयनारायण राय ने एक बयान जारी कर इन अफसरों का बचाव किया था। उनका कहना था कि सीवरेज में काम कर रहे अफसरों का कोई दोष नहीं है। पूर्व शहर विधायक और पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने इन्हें नियम से काम करने नहीं दिया था।

विधायक बोले- ऐसे अफसरों को यहां रहने का अधिकार नहीं

20 साल से अधिक समय तक निगम में जमे रहने और योजनाओं का कबाड़ा निकालने के सवाल पर शहर विधायक शैलेश पांडेय का कहना है कि भाजपा सरकार के राज में ऐसे अफसर एक ही जगह पर जमे हुए थे। अब इन्हें यहां रहने का कोई अधिकार नहीं है। मामला विधानसभा में उठाया गया है। इनका तबादला जरूर होगा। सीवरेज के बचे काम के आंकड़े बढ़ाने वाले अफसरों के खिलाफ जांच कराई जाएगी।

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