Saturday, February 21, 2026
Homeअन्यहिंदी राष्ट्रभाषा नहीं, न ही बन सकती हैः

हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं, न ही बन सकती हैः

कर्नाटक में हिंदी के इस्तेमाल पर विरोध और राज्य में अलग झंडे की मांग पृष्ठभूमि में प्रदेश के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बड़ा बयान दे डाला है. कांग्रेस सरकार के सीएम ने एक इंटरव्यू में कहा कि हिंदी हमारे ऊपर थोपी नहीं जा सकती. उन्होंने कहा कि हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है. सिद्धारमैया इस बात से इनकार किया कि केरल में हिंदी के प्रयोग के मुद्दे को कांग्रेस ने हवा दी है. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय प्रतिबद्धता को भारत की एकता के लिए खतरा नहीं कहा जा सकता.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक इंटरव्यू में कहा कि आप हमारे ऊपर हिंदी थोप नहीं सकते. हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है और कभी राष्ट्रभाषा बन नहीं सकती. ये हमारे देश की विभिन्न भाषाओं में से एक है. मैं किसी भाषा को सीखने का विरोधी नहीं है, चाहे वह हिंदी हो, तमिल हो या कोई दूसरी विदेशी भाषा. पर किसी भाषा को थोपा नहीं जाना चाहिए.’

सिद्धारमैया ने अलग कन्नड़ झंडे की मांग पर भी राय जाहिर की. सिद्धारमैया ने कहा कि किसी राज्य का अलग ध्वज होना संविधान के खिलाफ नहीं है. उदाहरण के तौर पर, संयुक्त राष्ट्र में, हर राज्य का अपना ध्वज और राष्ट्रगान है. इसलिए अगर मैंने अलग ध्वज का समर्थन किया भी तो वह राष्ट्रीय ध्वज से ऊपर नहीं है. राष्ट्रीय ध्वज हमेशा ऊंचाई पर रहेगा और राज्यों के ध्वज उसके नीचे. क्षेत्रीय भाषा पर दृढ़ रहना या अलग ध्वज का होना भारतीय संघ या संविधान के खिलाफ कतई नहीं है.
खुद को देशभक्त कहते हुए सीएम ने कहा कि हर कोई देश से प्यार करता है लेकिन क्षेत्रीय भावना का भी महत्व होता है. कर्नाटक का अगला चुनाव सांप्रदायिकता और सेक्युलेरिज्म के बीच लड़ा जाने वाला चुनाव है. बीजेपी सांप्रदायिक है और वह देश के सेक्युलर रंग को हटा देना चाहती है. हमारी लड़ाई इसी के खिलाफ है।

spot_img

advertisement

spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts

error: Content is protected !!
Latest
Verified by MonsterInsights