Wednesday, March 11, 2026
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रक्षा मंत्रालय करेगा अब तक का सबसे बड़ा सौदा, 114 नए लड़ाकू विमान खरीदेगा

(ताज़ाख़बर36गढ़) मोदी सरकार सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा करने जा रही है। सरकार  20 अरब डॉलर (1.4 लाख करोड़ रुपए) के 114 नए लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी कर रही है। यह दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा।

रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने कहा कि भारत में अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी लाने के मकसद से हाल में शुरू रणनीतिक भागीदारी मॉडल के तहत भारतीय कंपनी के साथ मिलकर विदेशी विमान निर्माता लड़ाकू विमानों का उत्पादन करेंगे। वायु सेना पुराने हो चुके कुछ विमानों को बाहर करने के लिए अपने लड़ाकू विमान बेड़े की गिरती क्षमता का हवाला देते हुए विमानों की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दे रही है।

सरकार द्वारा पांच साल में  यह पहला बड़ा सौदा होगा। इससे पहले राजग सरकार ने सितंबर 2016 में 36 राफेल दोहरे इंजन वाले लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए फ्रांस सरकार के साथ करीब 59000 करोड़ रूपये के सौदे पर दस्तखत किए थे।रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण 114 और विमान खरीदने की डील को जल्दी ही हरी झंडी दिखाने वाली हैं। माना जा रहा है कि यह डील अगले महीने तक हो जाएगी। बता दें कि भारत को अभी और लड़ाकू विमान खरीदने की जरूरत है। इससे पहले डील में भी भारत ने 136 वीमान खरीदने की डील की थी लेकिन तब भारत ने सिर्फ 36 लड़ाकू विमान ही खरीदे थे।

इस नई परियोजना के तहत पहले 18 विमान भारत आएंगे। इसके बाद विदेशी विमानन प्रमुख और भारत की डील पर 3 से 5 साल बाद नई रणनीतिक साझेदारी नीति के तहत भारत में उत्पादित किया जाएगा। इन 36 विमानों को वायुसेना की दो स्क्वॉड्रन में बांटा जाएगा। एक स्क्वॉड्रन को हरियाणा के अंबाला में जबकि दूसरी पश्चिम बंगाल की हाशिमारा में तैनात की जाएगी। कांग्रेस समेत विपक्ष मोदी सरकार पर ज्यादा कीमत में राफेल सौदा करने का आरोप लगा रही है जबकि सरकार करार में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से लगातार इनकार कर रही है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को दावा किया कि मोदी सरकार के पास राफेल विमान करार को लेकर उठाए जा रहे सवालों का कोई जवाब नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले को कोर्ट ले जाने से पहले पार्टी जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार करेगी। उन्होंने कहा कि राफेल करार बहुत बड़ा घोटाला है। यह करार विमान खरीद नीति को दरकिनार कर किया गया। रक्षा और विदेश मंत्रियों को भी इस करार के बारे में अंधेरे में रखा गया। 

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