Friday, March 13, 2026
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मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले मतदाताओं को प्रभावित करने वाले सर्वे दिखाने पर होगी सजा… इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में विज्ञापन पर रहेगी रोक…


बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ में होने जा रहे विधानसभा निर्वाचन के लिए पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। निर्वाचन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया माध्यमों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मतदान समाप्त होने के 48 घंटे पहले से मतदान समाप्ति तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम जैसे टेलीविजन, रेडियो, सिनेमा या अन्य कोई इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में किसी भी प्रकार का विज्ञापन प्रतिबंधित रहेगा।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के तहत प्रत्याशी, किसी दल द्वारा मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किसी भी प्रकार का विज्ञापन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में नहीं किया जाएगा। इसके तहत टेलीविजन में किसी भी प्रकार का सर्वे जो मतदाता को किसी प्रत्याशी अथवा दल के पक्ष या विरोध में प्रभावित करता है का प्रसारण नहीं किया जाएगा। इसमें किसी विश्लेषक, भागीदार द्वारा अपने मत अथवा विचारों से मतदाता को प्रभावित किया जा सकता है, अपील, परिचर्चा, दृश्य अथवा ध्वनि शामिल है। ऐसा कोई भी प्रसारण प्रतिबंध के दायरे में हैं तथा ऐसे किसी भी प्रसारण को अधिनियम का उल्लंघन समझा जाएगा।

अधिनियम के तहत ऐसा किए जाने पर दो साल तक का कारावास या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। इसके अतिरिक्त 48 घंटे के पूर्व तक प्रत्याशी, राजनीतिक दल द्वारा जिला एवं राज्य स्तर पर गठित मीडिया प्रमाणन समिति से प्रमाणित कराने के बाद ही विज्ञापन का प्रसारण कराया जा सकेगा।

भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचन की घोषणा के समय से लेकर उसकी समाप्ति और निर्वाचन परिणामों की घोषणा होने तक समाचार प्रसारकों द्वारा किए गए प्रसारणों की निगरानी करेगा। प्रसारकों द्वारा किसी प्रकार के उल्लंघन के बारे में निर्वाचन आयोग की ओर से न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैण्डर्ड अथॉरिटी (एनबीएसए) को मिली शिकायतों पर नियमों के अधीन कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रिंट माध्यमों के लिए भारतीय प्रेस परिषद द्वारा मार्गनिर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके तहत निर्वाचन और उम्मीदवारों के बारे में निष्पक्ष रिर्पोटिंग करना, साम्प्रदायिक व जातिगत आधार पर अभियान चलाना प्रतिबंधित करना, उम्मीद्वारों के व्यक्तिगत चरित्र और आचरण के बारे में आलोचनात्मक व्यक्तव्य नहीं प्रकाशित करना, उम्मीद्वारों या पार्टी के विरूद्ध आरोपों को सत्यापित किए बिना प्रकाशित नहीं करना जैसे अनेक महत्वपूर्ण निर्देश शामिल हैं।

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