Thursday, March 5, 2026
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विज्ञान मंत्रालय ने नकारा ICMR का दावा, कहा- Covid-19 वैक्सीन 2021 से पहले आने की संभावना नहीं…जानें क्यों…

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने Covid-19 का स्वदेशी टीका मेडिकल उपयोग के लिए 15 अगस्त तक उपलब्ध कराने की बात कही है। अब इस दावे को लेकर विज्ञान मंत्रालय ने कहा है कि कोई भी वैक्सीन 2021 से पहले उपलब्ध होने की संभावना नहीं है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने रविवार को कहा कि दुनिया में तैयार हो रहे 140 वैक्सीन में से 11 ह्यूमन ट्रायल फेज में पहुंच चुके हैं, लेकिन यह संभावना नहीं है कि इनमें से कोई भी अगले साल से पहले बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए तैयार हो जाएगा।

ह्यूमन ट्रायल फेज तक पहुंचे 11 वैक्सीन में से दो भारतीय हैं। पहला ICMR के सहयोग से भारत बायोटेक ने तैयार किया है तो दूसरा जायडस कैडिला ने विकसित किया है। इन्हें मानव परीक्षण के लिए मंजूरी मिल गई है।

विज्ञान मंत्रालय ने कहा, ‘छह भारतीय कंपनियां वैक्सीन पर काम कर रही हैं। दो भारतीय वैक्सीन COVAXIN और ZyCov-D सहित 11 वैक्सीन मानव परीक्षण फेज में हैं। इनमें से कोई भी 2021 से पहले बड़े पैमाने पर उपलब्ध होने की संभावना नहीं है।’

गौरतलब है कि 2 जुलाई को आईसीएमआर ने वैक्सीन के ट्रायल के लिए चयनित 12 क्लीनिकल साइट के प्रमुखों को लेटर लिखकर वैक्सीन का ट्रायल 15 अगस्त से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा था। इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ICMR के इस लेटर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकतार्ओं ने गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि वैक्सीन को लांच करने की इतनी जल्दी में गुणवत्ता से समझौता न हो जाए। ऐसी डेडलाइन में काम करने से अधूरे डेटा के साथ ही वैक्सीन लांच हो जाएगी।

हालांकि ICMR ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उसके लिए देश की जनता की सुरक्षा और हित सवोर्परि है। प्री क्लीनिकल स्टडी के डेटा की बारीकी से जांच करने के बाद ही भारतीय औषधिक महानियंत्रक ने चरण एक और चरण दो के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी दी है।

बता दें कि ICMR ने आंध्रप्रदेश, हरियाणा, नई दिल्ली, बिहार, कनार्टक, महाराष्ट्र,उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा और गोवा के अस्पतालों को क्लीनिकल ट्रायल के रूप में चयनित किया है। इन्हीं अस्पतालों में कोविड-19 के वैक्सीन के दोनों चरणों के मानव परीक्षण के लिए उम्मीदवार चयनित होंगे। ICMR ने कहा है कि कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी की वैक्सीन के लिए क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत है और दुनियाभर में फास्ट ट्रैक से इसे करने की कोशिश हो रही है।

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