Wednesday, March 4, 2026
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ऊंची पहाड़ियों पर मोर्चा संभालकर चीनी सेना की घेराबंदी तेज, रेजांगला में PLA से महज 300 गज की दूरी पर भारतीय जवान…

सेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि पैंगोंग लेक इलाके से चीन के पीछे नहीं हटने के बाद सेना ने अपने रूख को आक्रामक बनाया है। अब वह चीन को उसी की भाषा में जवाब देने को तैयार है। इसलिए, करीब पांच-छह ऊंची पहाड़ियों या स्थानों पर सेना ने हाल में अपनी तैनाती की है, लेकिन अभी कई ऐसी अहम रणनीतिक चोटियां हैं जिन पर चीन की निगाह हो सकती है। सेना इन पर भी अपने सैनिकों की तैनाती के लिए प्रयासरत है।

ब्रिगेडियर स्तर की बातचीत हुई

इस बीच, बुधवार को दोनों देशों की सेनाओं के बीच ब्रिगेडियर स्तर की बातचीत हुई। इसमें हालांकि, कई मुद्दों पर चर्चा हुई और सहमति भी व्यक्त की गई, लेकिन इसका जमीन पर कोई असर नहीं हुआ। इस बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।

जवान आमने-सामने डटे

सेना के सूत्रों के अनुसार रेजांगला इलाके में भारत और चीन के जवान बुधवार को भी आमने-सामने डटे हुए हैं। दोनों सेनाओं के बीच 300 गज से ज्यादा की दूरी नहीं है। हालांकि, सात सितंबर के बाद टकराव की दोबारा नौबत नहीं आई है। सेना के सूत्रों ने कहा कि चीन के करीब 40 जवान रेजांगला में भारतीय सेना के सामने खड़े हैं। जबकि नीचे बेस में करीब 7,000 जवानों के मौजूद होने की खबर है। भारतीय सेना की तैनाती इसी के अनुरूप की गई है।

लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता संभव

सेना के सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों की तरफ से इस बात पर जोर दिया गया है कि ताजा हालात के मद्देनजर लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की एक और वार्ता जल्द रखी जाए। दरअसल, दोनों देशों की नजर एससीओ बैठक में विदेश मंत्रियों की मुलाकात पर लगी है। इसके बाद अगले सप्ताह लेफ्टिनेंट जरनल स्तर की वार्ता होने की संभावना है।

चीन की उकसावे की कार्रवाई जारी

सरकार के सूत्रों का कहना है कि चीनी उत्तेजक कार्रवाई मंगलवार शाम 6 बजे तक जारी रही। चीनी सैनिकों ने मंगलवार को एलएसी में पूरे दिन उकसावे की कार्रवाई की है। सूत्रों का कहना है कि एलएसी पर मंगलवार को चीन की उत्तेजक कार्रवाई रेजांगला और मुखपरी चोटी के आसपास के इलाकों में थी। चीनी सेना अभी भी कॉमन क्षेत्र में बनी हुई है। हालांकि, बुधवार को कोई भी भड़काऊ कार्रवाई नहीं हुई।

सीमा पर बढ़ रहे गतिरोध के बीच, मॉस्को में गुरुवार को बार भारतीय और चीनी विदेश मंत्री तीन बार आमने-सामने होंगे। पहला मौका, एससीओ सम्मेलन के तहत विदेश मंत्रियों की बैठक होगी, दूसरे मौके पर रूसी विदेश मंत्री के साथ दोनों दोपहर के भोजन पर मिलेंगे। इसके बाद तीसरा मौका भारत और चीन की द्विपक्षीय वार्ता का होगा।
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